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प्रश्नोत्तर P7-0142 · भाग 7

हम दुष्कर्म और अंदर आने वाले विचारों से निकलना चाहते हैं, पर पैर-पैर पर गिरते हैं। ग्रंथों में पढ़ा है कि गुरु हमारे किए हुए सारे कर्म काट देगा और हमें सच्चे मार्ग पर चलाएगा। हमसे बन नहीं पा रहा, इसीलिए गुरु की जरूरत है। हम क्या करें, जब हमसे हो ही नहीं रहा? गुरु किसे मानें, शरीर को या शब्द को? और जब गलत काम होने लगता है, तो क्या वहां गुरु अपनी पावर से हमें हटा लेगा? रस में ऐसे लिप्त हो जाते हैं कि लगता है बुद्धि काम ही नहीं करती।

गुरु शब्द है, शरीर नहीं। गुरु तब कल्याण करेगा, जब आप उन शब्दों पर चलोगे। आप जब शब्दों में जियोगे, तो आपका कल्याण संभव है। सीधी सी बात है। लेकिन आप उन शब्दों को अपनाओगे ही नहीं, तो कोई मतलब नहीं है। जैसे आपको किसी ने रास्ता बताया, या आपने किसी को रास्ता बताया, और उस लक्ष्य तक जाने के लिए बता दिया कि कब, कहां से, कैसे मुड़ना है। लेकिन अब उसने किसी और रास्ते से चल दिया। तो क्या आपका दिया हुआ एक शब्द भी उसके काम का है? नहीं। आपका शब्द, या किसी और का शब्द, काम का तब है, जब वह उसी रास्ते पर चलेगा। जब गुरु ने जितना बताया है, उतना करोगे, तब गुरु की ऊर्जा भी काम करेगी। करना तो घुमा-फिरा के आपको ही है। जब आप करोगे, तब आपकी ऊर्जा भी काम करेगी, और गुरु की ऊर्जा भी आपके ऊपर काम करेगी। जब आप करोगे ही नहीं, तो कोई मतलब ही नहीं है। तो आप उस पर चलो। ईमानदारी किसके बस में है? आपके बस में है। गुरु थोड़ी ना करवाएगा। जब गलत काम होने लगे, तो मत करो। गुरु शब्द है। गुरु ने बोला है कि जब गलत काम हो, तो मत करना। पावर क्या है? जब हमें यही जानकारी मिल गई कि यह गलत है और यह सही है, यही पावर है। यह हमारे बस में है कि गलत ना करें। जब यह जानकारी दे दी गई, तो ऊर्जा क्या है, पावर क्या है? आपको जब यह मालूम पड़ गया कि यह सही है और यह गलत है, तो गलत ना करना आपके हाथ में है। मत करो। और करो, तो उसका परिणाम भोगो। गलत ना करना आपके हाथ में है। बस गलत मत करो, बात खत्म। रस में लिप्त होकर यह मत कहो कि बुद्धि काम नहीं करती, पता ही नहीं लगता। बुद्धि काम कर रही है, तभी रसपान कर रहे हो। बुद्धि काम नहीं करेगी, तो रसपान ही नहीं करोगे। बुद्धि जब काम करती है, तभी रसपान करते हो। बुद्धि नहीं काम करेगी, तो आप कुछ कर ही नहीं पाओगे। एक मंदबुद्धि कुछ कर पाता है क्या? एक बालक की बुद्धि उस स्तर पर काम नहीं करती। उसके सामने सोने की गाड़ी रख दो और एक प्लास्टिक की गाड़ी रख दो, तो कौन सी उठाएगा? प्लास्टिक। क्योंकि उसकी जरूरत वही है। तो रसपान तुम तभी कर पाते हो, जब तुम्हारी बुद्धि काम करती है। अगर बुद्धि काम ना करे, तो आपके सामने संसार का सारा भोग ऐसे पड़ा रहे, आप कुछ नहीं करोगे। जैसे मंदबुद्धि, पागल, उनके सामने कभी देखा है कि वे किसी भोग की तरफ भागते हों? वे कचरे में भी अपना भोजन कर लेते हैं, किसी भी तरीके से भोजन कर लेते हैं। तो रसपान आप तभी करते हो, जब आपकी बुद्धि काम करती है। बुद्धि काम ना करे, तो आप रसपान ही नहीं कर पाओगे। आप पूरे जिम्मेदार व्यक्ति बनिए, और आप गलत मत करिए। अभी भी आपके पास मौका है। आपके पास जानकारी आ गई कि यह गलत है, यह सही है। यह करने से मैं गिरूंगा, यह करने से मैं उठूंगा। तो आप उठने वाला काम करिए, गिरने वाला काम मत करिए। और यह पूरा आपके हाथ में है। आपके कंधे पर कोई बंदूक रख के, कनपटी पर रख के थोड़ी ना कह रहा है कि गलत करो। ऐसा है क्या? आप अपनी कामनाओं में, अपनी इच्छाओं में आकर गलत करते हो। तो आप मत करिए। बहुत साफ-सुथरी बात है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12