प्रश्नोत्तर P7-0094 · भाग 7
घर गृहस्थी में रहते हुए साधना कैसे हो सकती है? साधना का मतलब अपने आप को सुधारना है क्या? शेड्यूल इतना व्यस्त है कि अपने लिए थोड़ा समय नहीं निकलता। अभी रिटायर हुई हूं, पहले टीचर थी।
साधना अपने आप को सुधारना ही है। पहले देखो, बिगड़ी कहां है। बिगड़ी टाइम टेबल पर बिगड़ी है। बस सुधार लो। जैसे घर में एक मशीन बिगड़ जाए, तो कैसे सुधारोगे? जब पकड़ पाओगे कि कहां बिगड़ी है। यह नहीं पकड़ पाए तो सुधार नहीं होगा। शेड्यूल इतना बिजी है कि थोड़ा समय नहीं निकलता, यह कह रही हो। क्या बिजी है शेड्यूल? आप रिटायर हो चुकी हो। अब कहां शेड्यूल बिजी है? अभी तो आपके पास टाइम ही टाइम है। आप टीचर थीं। आपके पास तब भी समय मिलता था, घर गृहस्थी का भी था, साधना के लिए जितना बनता था। अब तो मिल गया। अब शिकायत मत करिए। अब पूरी तरह लग जाइए। पूरी कोशिश करिए।
या तो नाती के नाती खिलाइए। दो में से एक ही काम हो सकता है। या अपने उद्धार के लिए पूरी तरह लग जाओ, या नाती के नाती खिलाने का ख्वाब देखो। दो ही रास्ते हैं। बेटे को खिलाया, वही हाल नाती खिलाने में भी होगा। ज्यादा नहीं होगा। बेटे को तो खिला चुकी। नाती खिलाओगे तो वही हाल होगा। इस उम्र में दो ही रास्ते होते हैं। या लड़के के लड़के के लड़के को खिलाओ, उसकी शादी विवाह करो, या अपना कल्याण करो। देख लो। आप तो अब खाली हो गईं, पेंशन भी आ रही है। आप बहुत तेजी से अपना आत्मिक कल्याण कर सकती हो, क्योंकि आपके पास धन भी है। एक बल है आपके पास। उस बल का सदुपयोग करिए। समाज सेवा में लगाइए। जहां जरूरतमंद मिले, अच्छा मौका मिला है। किसी से मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लग जाइए धन से, तन से, ज्ञान से। अपनी आत्मरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए, अपनी समझ के साथ, पूरी तरह लग जाइए। आत्मिक कल्याण करना हो तो यह करो। और नहीं तो कोई बात नहीं। ऐसे ही जिंदगी मिली है, और ऐसे ही निकल जाती है।
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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03