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प्रश्नोत्तर P7-0093 · भाग 7

शरीर को कैसे स्वस्थ रखें, ताकि जहां धन नहीं, शारीरिक बल चाहिए, वहां सेवा कर सकें? दिनचर्या और खानपान कैसा हो? जोड़ों का दर्द उम्र के साथ हो रहा है। और कहीं सहयोग दें तो क्या देखें? पारदर्शिता कहां हो?

बढ़िया काजू, किशमिश, बादाम, छुआरा, मुनक्का, दूध खाओ, केसर खाओ। स्वस्थ रहो। अच्छा भोजन करो। स्वस्थ रहने का एक ही उपाय है। कोई मशीन सही रखनी हो तो उसमें अच्छा तेल डालते हो। गाड़ी है तो बढ़िया मोबिल ऑयल देती हो। वैसे ही शरीर को बढ़िया भोजन कराओ। बढ़िया मतलब बाहर से महंगा नहीं, पौष्टिक भोजन। स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या देखो। क्या खाती हो, कितना आहार लेती हो। न ज्यादा लेना है, न कम लेना है। जोड़ों का दर्द समय के साथ, उम्र के साथ हो रहा है। खानपान पर ध्यान दीजिए। कैल्शियम की कमी से भी हड्डी में दर्द होता है, तो कैल्शियम खाइए। कैल्शियम की दवा ले लीजिए, या कैल्शियम वाला कोई फल हो तो फल खाइए। कहीं भी सहयोग दो, तो देखो कि वहां जरूरत है, और उसके बाद वही काम हो रहा है या नहीं जितना वह समाज को बता रहा है। यह देखने के बाद सहयोग दीजिए। मैं सबको यही कहता हूं। यहां भी सहयोग देना हो तो जांच लो। मैं नहीं चाहता कि आपका एक भी नुकसान हो। यहां लोग सहयोग देते हैं, तो मैं उनको भी कहता हूं कि जांच करके करो। ऐसे मत करो। खूब जांच लो। अपनी समझ से समझ लो, तब सहयोग करना। जांच के ही आगे बढ़ो। बिना जांचे बाद में पछताना पड़ेगा। जांचना आपका काम है। हमारे यहां कोई माचिस मांगने आता है तो मैं कहता हूं, क्या करोगे, पहले बताओ। बीड़ी पियोगे तो नहीं देंगे। पहले उससे पूछता हूं। एक जगह हम बैठे थे, एक व्यक्ति आया और महाराज जी से बोला, माचिस दे दो। वह देने लगे। कहा, पूछो तो, करेगा क्या। माचिस का क्या करेगा, क्योंकि आप एक ताकत दे रहे हो। वह माचिस आग लगाएगी। उसने कहा, खेत में आग लगाऊंगा। कहा, महाराज जी, कितने जीव की हत्या होगी। आप निमित्त क्यों बन रहे हो। माचिस नहीं देंगे, जाओ। नहीं दी। महाराज जी ने नहीं दी। अगर नहीं पूछते, तो जिम्मेदार वह भी होते। जब किसी को सामान दे रहे हो तो पूछ लो, भैया इसका करोगे क्या। झूठ बोलता है तो जिम्मेदार वह होगा। पर आपका इतना कर्तव्य है कि एक रुपया भी दो, तो पूछ लो, इस पैसे का क्या करोगे, मुझे इतना बताओ। सौ रुपये दे रहे हो तो पूछ लो, क्या करोगे। पता चला क्वार्टर पीने जा रहा है, तो जिम्मेदार आप हो। आपने पूछा क्यों नहीं। परिवार का सदस्य ही क्यों न हो। भैया, मेरी मेहनत की कमाई है, आपको दे रही हूं, बताओ लेकर क्या करोगे। उसके बाद वह कुछ अलग करता है, तो जिम्मेदार वह होता है। आप पूछकर निकल गईं। इसलिए कुछ भी देने से पहले, लेनदेन से पहले, पूछताछ कर लीजिए।

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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03