प्रश्नोत्तर P7-0074 · भाग 7
ऐसे लोगों को आप कैसे झेलते हो? जो ईमानदार हैं, आवेशी हैं, बात नहीं मानते, डांट भी देते हैं, उन्हें सुधारक क्यों सहता है, और उन्हें संवारने में कितना सहना पड़ता है?
आपको लगता है कि आप ऐसे लोगों को कैसे झेलते हो। अब मैं बताता हूं कि मैं क्यों झेलता हूं। मान लो, कुछ समय पहले ये स्थिति नहीं होती। ये मुझे डांट देता था कि मुझे ये काम नहीं करना है। मैंने कहा, बेटा, इसकी ईमानदारी की वजह से ये मुझ पर चढ़ जाता था। क्या करूं। मैंने कहा, बेटा, तू सीख। क्योंकि इसकी ईमानदारी की वजह से इसे झेलना पड़ता था। मतलब ये बात करने लायक है, मेरे साथ बैठने लायक है। हर व्यक्ति हर स्थिति से ऐसा नहीं होता। आपको भी पता चल गया। इसे भी पता है।
पर इसके अंदर एक ईमानदारी थी। और ऐसे लोगों का समाज शोषण कर लेता है। इन्हें यूज कर लेता है। क्योंकि ये आवेशी हैं, जज्बाती हैं, ईमानदार हैं। ये तुरंत छोड़कर चले जाएंगे। तो समाज के लोग क्या करते हैं? कोई एक महीना, कोई एक साल, इन्हें यूज कर लेता है। जब मुझे ऐसे लोग मिलते हैं, तो मैं उन्हें झेलता हूं। बस उन्हें उठाने के लिए झेलता हूं। कैसे भी इन पर से वो असर उतर जाए, अगर ये मेरे जीवन में मिले हैं। ये बहुत अच्छे लोग हैं। अगर आप थोड़ी देर के लिए ये मत देखो कि ये किस तरीके से काम करते हैं, क्या करते हैं, वो हटाकर इन्हें देखो, तो आप कहोगे कि ये इतने अच्छे इंसान इस पृथ्वी पर हैं। हां, हैं। बस अपना काम मत देखिए। थोड़ी देर के लिए छोड़िए कि ये कैसे करते हैं। इन्हें देखिए। आप कहोगे, इनमें इतनी शुद्धता है।
ऐसे लोगों को झेलना पड़ता है। इनके लिए झेलना ही पड़ता है। इनमें एक अच्छाई है। वो अच्छाई जल्दी लोगों में मिलती नहीं। समझदार आपको बहुत मिल जाएंगे। टैलेंटेड बहुत मिल जाएंगे। ईमानदार और सच्चा इंसान जल्दी नहीं मिलता। अगर वो मिल जाए, तो उसकी गलती मत देखिए। वो गलती सुधारेगा। प्यार से, धीरे-धीरे, प्रेम से सुधारेगा। पहले उसे प्रेम में उतारिए, फिर वो सुधरेगा।
मैं आपको बता दूं, इनसे मुझे दबकर बात करनी पड़ती थी। ये मेरे सामने किसी स्थिति में खड़े नहीं हो सकते। लेकिन इनसे मैं दबकर बात करता हूं। क्योंकि ये हमारी क्षमता बर्दाश्त ही नहीं कर सकते। मेरी आवाज बर्दाश्त ही नहीं कर सकते। इन्हें मुझे सहना पड़ता है। मैं इन्हें उतना ही बोलता हूं, उतना ही प्रेशर देता हूं, जितना ये बर्दाश्त कर सकें। अगर मैं पूरी ताकत से, जिस तरीके से मैं जीता हूं, उसी तरीके से बोलूं, तो ये मेरे पास रह ही नहीं पाएंगे। और ये जब समाज में जाएंगे, तो समाज इनका शोषण करेगा। मुझे मालूम है समाज कैसा है। सबको मालूम है। इसलिए जब जीवन में ऐसे लोग मिलते हैं, तो मैं इनको संवारता हूं। इनके सत्य के लिए मैं बहुत सहता हूं। कभी-कभी मुझे आंसू आ जाते हैं। क्योंकि मैंने कहा था कि मैंने अपनी जिंदगी का एक क्षण भी बर्बाद नहीं किया।
आप देखो, मैं कितनी भागमभाग करता हूं। आपने मुझे देर तक सोते हुए देखा है? हर समय मैं भागता रहता हूं। कभी मानसिक, कभी शारीरिक। अभी आया, तो बैठते हुए नहीं देखा गया। कूदकर आया, स्नान किया, और लग गया काम पर। पानी भी रहा। अभी बैठकर पिया नहीं। एक-आध घूंट गया, नर्मदा जी का पी लिया, बात अलग है। हर समय काम। आज मुझे लायक बन रहे हैं। बहुत सहना पड़ता है।
एक सामर्थ्यवान व्यक्ति को बहुत सहना पड़ता है। कमजोर व्यक्ति थोड़ी सह पाता है। वो तो भाग जाएगा। सामर्थ्यवान ही सहता है, कमजोर नहीं। इसलिए बहुत समझकर बोलना पड़ता है कि ये कितना प्रेशर बर्दाश्त कर सके। क्योंकि सबकी बुद्धि का स्तर, सबकी समझ का स्तर अलग-अलग होता है।
अगर किसी को संवारना है, तो एक मां भी बच्चे को पूरी ताकत से नहीं पकड़ सकती। वो धीरे-धीरे उसे संवारती है। वो पूरा ज्ञान एक दिन में नहीं दे सकती। धीरे-धीरे संवारती है। और धीरे-धीरे एक दिन ऐसा आता है कि वो सब कुछ करने लायक हो जाता है। यहां सबकी बुद्धि अलग है, सबका आत्मविश्वास अलग है, सबका कॉन्फिडेंस लेवल अलग है।
और जब आपको समाज के लिए काम करना है, विश्व के लिए काम करना है, तो बहुत कुछ सोचकर बात करनी पड़ती है। क्योंकि हम एक-दो व्यक्ति के लिए काम नहीं कर रहे। मैं एक-दो व्यक्ति के लिए काम नहीं कर रहा। मैं काम विश्व के लिए कर रहा हूं। जब विश्व के लिए काम कर रहा हूं, तो उसी तरीके से काम भी करना पड़ेगा। बहुत कुछ समझना पड़ता है।
इसीलिए आज भी मैंने मन से कहा, चलो, अब मैं जा रहा हूं। अब एक काम करना। तुम सोचना। इस बेटी के बारे में जरूर सोचना। बैठकर, आराम से सोचना। किस तरीके से, हर बात को सहते हुए, सब कुछ सहते हुए, वो काम कर रही है। कभी सोचना।
क्योंकि यहां अगर मुझे कोई सबसे करीबी है, मतलब सबसे ज्यादा मुझे जानने वाला, कई वर्षों से, तो हेमंत है, दो हजार उन्नीस से। राजेश भी मुझे दो हजार बाईस से लगभग जान रहा है। सबसे पुराना अगर कोई है, तो हेमंत। और ये मेरी हर स्थिति को जानते हैं। मैं कैसे काम करता हूं। इन्होंने इस काम में बहुत सपोर्ट दिया है। चाहे चैनल चलाकर, चाहे आर्थिक। कभी मुझे पैसे की जरूरत होती है, इनको फोन कर देता हूं। मैं और लोगों से कर्जा लेता हूं। लेकिन इस व्यक्ति से मैं लेता हूं, और ये देता ही नहीं मांगता। मुझे कभी ऐसा हुआ ही नहीं कि वापस करना पड़े। इनका बहुत सहयोग रहा। आदमी का मतलब, बहुत कुछ देखना पड़ता है।
अगर काम करना है, तो बहुत कुछ देखना पड़ता है। और काम नहीं करना है, तो निकालो, जाओ। तुम भी जाओ, तुम भी जाओ। यार, रहेंगे, पड़ेंगे अभी। लेकिन विश्व के लिए काम करना है, तो किसी न किसी को तो उस काम में जोड़ोगे। इनको क्यों नहीं? ये तो मिले हैं। प्राकृतिक रूप से मिले हैं। इनको मौका क्यों नहीं दे रहे? ये अभी नहीं समझ रहे। कुछ साल बाद समझेंगे। अभी इन्हें पूरा समझ नहीं आ पा रहा कि इन्हें क्या मिला है, करने को। लेकिन कभी न कभी जीवन में समझ में आएगा।
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वीडियो: किसी को सुधारने के लिए सुधारक को कितनी मेहनत करनी पड़ती हैं ? #yogiji_ka_satsang · 2025-06-27