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प्रश्नोत्तर P6-0079 · भाग 6

अगर एक व्यक्ति केवल फोटो लगाकर माला जपे और दूसरा काम में हाथ बंटाए, तो प्रसन्नता किस पर होगी? शरीर मिल जाने से ही क्या मनुष्य हो गए? मानव और जानवर में क्या अंतर है, और बेईमानी से फंसे हुए को छुटकारा कैसे मिलता है?

यह बात समझ में भी आती है। मान लो तुम्हें ही कहीं रखा गया, और दो बैग तुम्हारे अंदर दे दिए गए। दोनों को कहा गया कि दोनों को रखो, और एक साल बाद दोनों के बारे में बताना। तो एक ने आपका फोटो लगाकर बढ़िया पूजा-पाठ करने लगा, और एक आपके जितने काम थे सब करने लगा, आपके काम में हाथ बंटाने लगा। एक साल बाद दोनों के बारे में पूछा जाएगा, तो क्या बोलोगे? फोटो लेकर बैठा है, हो, बैठा रहो। कोई भी हो, आप अपने आप को मालिक की जगह रखकर देखो। हमारे सामने अगर दो भक्त आ जाएं, एक मेरे काम में हाथ बढ़ाए, और एक मेरा फोटो लेकर माला जपे, कोई काम न करे, बस खाए-पिए-सोए और मेरी माला जपे, तो आप किस पर प्रसन्न होगे? काम वाले पर। तू तो मेरा ही काम कर रहा है न। यह बात समझ में भी आती है। दो व्यक्ति हों। एक कहे, मैं शुद्ध आत्मा हूं, मैं प्योर सोल हूं, ऐसे ध्यान लगाकर बैठे कि मैं आत्म तत्व में स्थिर हो रहा हूं, दिन भर ऐसा करे। और एक व्यक्ति तुम्हारे सारे काम में हाथ बढ़ाए, जितना उससे हो सकता है। तो आप किस पर प्रसन्न हो? मां अपने फोटो वाले से कहे, जा, तू मेरा यह काम करेगा, तो मना करना पड़ेगा। ये बातें समझ में भी आती हैं। लेकिन आलसी लोग हैं, जिनको समाज के लिए कुछ करना नहीं है। जितने लोग जानवर की जिंदगी जीते हैं, मैं सीधी बात बता रहा हूं। जानवर का मतलब क्या, अपने बच्चों तक करना। मानव का मतलब क्या, समाज के लिए करना। आप यह मत समझना कि शरीर लेने से मानव हो गए। अगर आप समाज के हित के लिए कार्य करते हो, तब आप मानव हो। एक समूह की बात नहीं कर रहा हूं। समूह के लिए काम करने वाले बहुत हैं। अगर कोई एक घर के लिए काम कर रहा है, एक समूह के लिए काम कर रहा है, दोनों में कोई फर्क नहीं है। समाज हित मतलब किसी के लिए भी। अगर आप काम कर रहे हो, तो अब आप मानव हो। और अगर आप सिर्फ अपने परिवार के लिए, या एक समूह बनाकर काम कर रहे हो, तो आप समझ लीजिए कि जानवर हो। मानव और जानवर में यही फर्क है। और मानव शरीर में ही व्यक्ति परमात्मा से मिलता है। मानव का काम समझो। ईमानदारी से सत्कर्म में लगे रहना, यही मानव का कार्य है। और इससे परमात्मा मिलता है, परम सत्ता मिलती है। तीन गण बोले गए हैं। देवगण, राक्षस गण, मानव गण। मानव गण मतलब सात्विक प्रवृत्ति में जीने वाले को मानव गण कहा गया है। तामसी और राजसी प्रवृत्ति में जीने वाले संसार में भटकते रहते हैं। आप देखो, आप किस प्रवृत्ति को धारण किए हो। सात्विक प्रवृत्ति मतलब परोपकार में लगा है, ईमानदारी के साथ। तब आप मानव प्रवृत्ति हो। मानव प्रवृत्ति वाला उस परम सत्ता से मिलता है। कहा गया है, बड़े भाग्य मानुष तन पाए। मानुष तन पाया, तो उसका कुछ काम होगा न। ऐसे थोड़ी छोड़ दिया है। उसके पीछे कोई कार्य है। आप देखो कि वह कार्य कर रहे हो, वह स्वभाव धारण किए हो। ज्यादातर या तो राक्षस स्वभाव धारण करते हैं, या देवता बनकर पॉजिटिव-नेगेटिव में जीते हैं। सात्विक में बहुत कम लोग जीते हैं। सात्विक वाला उस परम सत्ता से मिलेगा। सात्विक वाले का आत्मकल्याण होगा। सात्विक वाले को आत्मदर्शन होगा। अब देख लो। आपको फैसला देना हो, तो आपने कहा, फोटो वाले को, माला वाले को तो मैं कुछ नहीं दूंगा। लेकिन जिसने मेरे काम में सहायता की, उससे जरूर मिलूंगा। आपको दोनों में से एक से मिलना हो, किससे मिलोगे? जो आपके काम में सहायता करे। तो अगर इस जगत में परमात्मा के कार्य में सहयोग करते हो, जरूरतमंद की सेवा करते हो, ईमानदारी के साथ, तब जाकर परमात्मा आपसे खुद मिलने आएगा। आप खुद सोचो। आपको रखा जाए, और आपके सामने ऐसे व्यक्ति रखे जाएं। एक समूह आपका माला-फोटो जपे, फर्स्ट क्लास। और एक समूह आपके काम में हाथ बंटाए। किससे मिलोगे? इस सिद्धांत को समझ लो। यह हर जगह लागू होता है। इस बात को बहुत गहराई से समझ लो। विधियों से मुक्त होकर, मेहनत के साथ, कर्म के सिद्धांत को समझो। और धन से, तन से, और अपनी समझ से, समाज के हित के लिए कुछ कार्य करो। अब देखो, यहां यह बड़ा पेड़ है। पता नहीं किसने लगाया। कितना साधना में सहयोगी है। लाखों जीव इस पर भोजन कर रहे हैं। और आज देखिए, अपनों की कुटिया के द्वारा कितने बड़ और पीपल के पौधे लगाए गए। आने वाले समय में, जैसे आप लोग साधना कर रहे हो, तो उसको आशीष जा रहा है जिसने इसको लगाया है। जब तक यह रहेगा, तब तक उसको आशीष जाएगा। आज अपनों की कुटिया में इतने पौधे लगाए गए हैं, हजारों साल चलेंगे। तो हजारों साल अगर कोई साधक आकर यहां एक पानी भी देगा, तो उस लगाने वाले को भी हजारों साल आशीर्वाद जाएगा। और यही तो मुझे तारेगा। मेरा कर्म ही तो मुझे तारेगा। मेरा कर्म ही तो मुझे फंसाया है। किसी छेद में आप हाथ डाल दो, तो निकालने के लिए उसी छेद से पीछे आना पड़ेगा। लेकिन तुम सोच रहे हो, मैं किसी और छेद से निकाल दूं। आपको लगता है कभी हाथ निकलेगा? आप बेईमानी करके फंसे हो, ईमानदारी करके वापस आ जाओ। इस सिद्धांत को समझ लो। साफ-सुथरा समझ में आया।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 31 मई 2026 #योगी · 2026-05-31