प्रश्नोत्तर P6-0035 · भाग 6
मन की परिभाषाएं अलग-अलग — राग-द्वेष पिंडों में कैसे अलर्ट रहें?
मुझे अपना काम करते रहना चाहिए, ईमानदारी से, और सत्कर्म करते रहना चाहिए। बस। और अपने आप में रहना चाहिए। बस।
और वो मन, जब रात में स्वप्न आता है, तो हो क्या रहा है? स्वप्न आता है तो कहीं न कहीं उस स्वप्न का आधार है। कभी हमने कुछ प्लानिंग किया था, कर नहीं पा रहे। तो ऐसे स्वप्न आते हैं। धीरे-धीरे वो भी चले जाएँगे। उनको लेके कोई टेंशन नहीं। कोई मतलब नहीं।
अकेले पड़ने का जो डर आता है, उसको क्या करेंगे? अकेले ही तो यात्रा होगी, परमानंद। उसी में तो अपने आप को स्थिरता बना के रखेंगे।
फोन को काटिए मत। फोन चालू करके सुनते रहिए। आप प्रतिक्रिया नहीं दोगे, तो चिपकू टाइप के लोग कम से कम पचासों बार और कर देंगे। आप अगर प्रतिक्रिया नहीं देंगे, कोई भी व्यक्ति, जानवर तक, आप प्रतिक्रिया देना बंद कर दो, वो आपके पास आना बंद कर देंगे। आपसे अगर कुछ मिल रहा है, बस वो देना बंद कर दो। तुम्हारे अलावा तुम्हारे पास कोई नहीं बचेगा। वो बचेगा ही नहीं। हम कुछ देंगे ही नहीं, तो आएगा क्या? अगर ये कपड़ा भी तन पे है, तो इसकी सुरक्षा किए हो। अगर इसकी भी सुरक्षा बंद कर दो, तो ये भी आपको छोड़ के चला जाएगा। अगर मेरे साथ कोई है, तो कहीं न कहीं वो मेरी वजह से है।
मूर्खता का पछतावा, कोई बात नहीं, अब तो कर लिया। अब मत करो। लेकिन अब उसकी मूर्खता के लिए पछताओ भी मत। ऐसा ना हो, पछताने में जिंदगी चली जाए। एक मूर्खता करने में जिंदगी गई, अवशेष जितना बचा है उसको पछताने में किया, कुछ नहीं। ये भी मन का ट्रैप है। वो कहता है पछताने के लिए, लेकिन पछताना नहीं। कहीं भी, एकदम नहीं पछताना है। हुआ सो हुआ। अपना ख्याल रखिए। अपना आत्मिक कल्याण करिए। और पछताइए मत। पछताने में समय बर्बाद मत करो।
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