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प्रश्नोत्तर P6-0034 · भाग 6

साधु, संत, महात्मा, वैरागी कौन?

स से साधु, धू से धूल। धूल का मतलब विकार। साधु एक भेष है। संत की स्थिति है। जैसे गृहस्थ जीवन में शादी के पहले कहा जाता है, यह लड़का है, ये लड़की है। लेकिन जैसे ही शादी होती है, कहा जाता है, ये पत्नी है, ये पति है। साधना करके जिसने अपने आप को निर्विकार करा लिया, वो संत हो गया। महात्मा, महान आत्मा। चैतन्य में स्थिर अपने आप को करा दिया, उसे महात्मा कहते हैं। बैरागी मतलब, जहाँ मैं हूँ वहाँ कुछ है नहीं। मैं यहाँ क्यों हूँ, तो पता चलेगा, राग-द्वेष में हूँ। जब राग-द्वेष समझ में आया कि मैं राग-द्वेष में हूँ, तो राग-द्वेष से छुड़ाने की जब इच्छा जगे, तो उसे वैराग्य कहते हैं। राग मतलब, जब योग्यता से ज्यादा देगा, तो उसके प्रति लगाव हो जाएगा, तो राग कहते हैं। और जब योग्यता से ज्यादा आपने इच्छा की, और सामने वाला नहीं दिया, तो उसके प्रति द्वेष हो जाएगा। ये है राग और द्वेष। माँ-बाप के सामने, गुरु के सामने, लेन-देन में राग-द्वेष नहीं होता।

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वीडियो: दिल्ली में पहला सत्संग पार्ट 3 #योगी · 2026-02-02