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प्रश्नोत्तर P6-0022 · भाग 6

पिछले शरीर का दर्द रह गया; बेसिक नेचर पुराना — कैसे काम करें?

कभी-कभी बैक साइड में दर्द होता है। मशीन फेल हो जाती है। दर्द का कारण पता ही नहीं चलता। वो दर्द अगले शरीर का ही है। दर्द में ही शरीर छोड़ा था, और इस शरीर में दर्द लेके ही आया। पता भी नहीं चलता। शरीर तो बदला, अंग तो सही है, लेकिन दर्द रह गया। इलाज भी नहीं हो रहा। ऐसे बहुत रोग हैं, जांच में मिलते ही नहीं। एक समय ऐसा आता है कि अपने आप ठीक हो जाता है। हम अगले शरीर में बहुत सारी चीजें लेके आते हैं। पहले आदत नहीं बनती। पहले होती है जरूरत। शुरुआत जरूरत से होती है। उस जरूरत की पूर्ति करते-करते आदत बनती है। आदत बार-बार करने से संस्कार बन जाता है। आदत बनने में समय लगा है। एक दिन में आदत नहीं बनती। जब रोज-रोज प्रैक्टिस हुई, तब बनी। तो रोज, जब भी उस आदत करने की बारी आए, उसी समय अपने आप को रोक लो। हर समय तो वही करते नहीं हो। कर्म में जब बुरी आदत करने की बारी आए, उसी समय रुक जाओ, मत करो। इस पर काम करोगे, तो धीरे-धीरे छोड़ पाओगे। एक दिन में नहीं छूटेगी। हर समय सचेत रहना पड़ेगा। जैसे ही वो आए, नहीं करना। जैसे ही आए, नहीं करना है। उसी समय मार देना है। ऑटोमेटिक मूड तोड़ देना है। पहले सचेत होना है कि स्वभाव में ये गड़बड़ है। जैसे कोई बच्चा ऑटोमेटिक झूठ बोल देता है। उसे पता भी नहीं होता। कहता है अब ऐसे नहीं बोलूंगा, फिर भी मूड में बोल ही देता है। वहां मतलब भी नहीं होता। तो शुरुआत यही है कि जब बोलने का समय आए, उसी समय रोक लो, झूठ नहीं बोलना। काम उसी समय करना पड़ेगा। एक बार में नहीं रुकेगा। बनने में बहुत समय लगा है, छोड़ने में भी बहुत समय लगेगा। अभ्यास करना पड़ेगा। अभ्यास करते-करते एक दिन छूट जाएगा। अभी भी उसमें रस ले रहे हो। रस मिल रहा है। बिना रस के कुछ करोगे ही नहीं। इतना कर भी रहे हो, कुछ मिल रहा है, वो नहीं जा रहा। जिस समय करने की बारी आए, उस समय दिमाग में आता ही नहीं, तो मत करो। वो उस समय नहीं आता। होने के पहले ही सचेत रहना है। होने के पहले ही सचेत रहना है। जब वो पैदा हो, उसी समय मारो। जब उसका जन्म हो, उस समय तकलीफ भी होगी, क्योंकि रस नहीं मिलेगा। मजा नहीं आएगा, क्योंकि आपने मजा लिया है। बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ेगा। लेकिन जैसे ही जन्म हो, उसी समय मार दो। हो सकता है उसका टोन ही वैसा हो। जैसे गोयल जी बैठे हैं, इनका टोन हरियाणा का है, पूरे दुनिया में ऐसा टोन है। टोन हो सकता है वैसा हो, तब समझ आने लगती है। आपको देखना है। हो सकता है उसका टोन ही ऐसा हो। आप लोगों का टोन तो मशहूर है दुनिया में। लट्ठमार भाषा। आप अगर प्रेम से भी बोलते हो, तो ऐसा लगता है कि सामने वाले को दबा रहे हो। आपको देखना है कि इसका टोन तो वैसा नहीं है। चुप मत हो। चुप होना भी एक कमजोरी है। आपको भी घुटन होगी। वो अगर अपनी प्रवृत्ति बदलेगा, तब। आपके बदलने से क्या होगा? आप जिसके साथ रहे हो, उसका भी तो प्रभाव पड़ेगा। जहां आप बदल सकते हो, बदल लो। जब आप बदल के सामर्थ्यवान रहोगे, तभी किसी का प्रभाव आप पर काम नहीं करेगा। अगर आप किसी पर निर्भर हो, और सोचो कि उसका प्रभाव मुझ पर काम ना करे, तो करेगा ही करेगा। अपने आप को सामर्थ्यवान बनाओ। सबसे पहले समझ के साथ सामर्थ्यवान बनाओ।

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