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प्रश्नोत्तर P4-0199 · भाग 4

(वही साधिका) जब हमारे मुख से सत्य वचन निकलने लगते हैं, तो बिना बोले रुका भी नहीं जाता। तो जो निकल रहा है, उसे क्या कहेंगे — सत्य? और सद्गुरु क्या बोलता है?

सत्य वचन कभी निकलता ही नहीं। झूठ निकलता है, सत्य कभी निकलता ही नहीं। (जो निकल रहा है, उसे सत्य कह रहे हैं —) बस आगे वाले के लिए एक मार्ग है। सत्य कभी बोला ही नहीं जा सकता। सत्य तक पहुंचने का मार्ग मिलता है; सत्य कभी बोला नहीं जा सकता, उस तक पहुंचने का मार्ग है। वो सिर्फ अनुभव है — वो पहुंचने के बाद पता चल जाएगा। उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि व्यक्त आप करोगे, तो कोई आधार होगा, कोई बेस होगा, और किसी के लिए व्यक्त करोगे; तो जिसके लिए व्यक्त कर रहे हो, वो जिसके द्वारा ले रहा है, वो भी बदलेगा — आधार-बेस आपका बदल जाएगा। इसलिए सत्य कभी बोला नहीं जा सकता। (तो सद्गुरु क्या बोल रहा है?) अब वो सत्य तक पहुंच गया — उस सत्य तक पहुंचने का मार्ग बता रहा है; जिस रास्ते (से) पहुंचा, (वो) बता रहा है — वो आपको मार्ग बता रहा है, इशारा कर रहा है। (हमें रास्ता मिला है, तो हमें लगता है हम भी किसी को बताएं —) एक तो आप बताएंगे ही बताएंगे।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17