प्रश्नोत्तर P4-0185 · भाग 4
(वही साधिका) संत रविदास जी ने गंगा मां को भेंट भेजी और मां ने कंगन दिया; रामकृष्ण परमहंस मां काली को भोजन कराते थे; फिर भी आज लोग कहते हैं गंगा तो पानी है, मूर्ति पत्थर है, सब पाखंड है। इन दोहरी बातों को कैसे समझें? (मुझे लगता है रविदास जी के बताए मार्ग पर चलकर ही प्रमाणित कर सकती हूं कि है या नहीं।)
(संत रविदास) अध्यात्म के साइंटिस्ट हैं। देखिए, जैसे संत रविदास — इन्हें तो उस परम स्थिति में देखा जाता है। आज कितने लोग बोलते हैं गंगा मां नहीं है, पानी है, तो पाखंड है; लेकिन उन्होंने खुद मां को भेंट भेजी थी और मां ने स्वीकार किया था — उन्हें कंगन भेजा, ये कहानी है। तो जब ऐसे संत ने सिद्ध कर दिया, (कि) उनके लिए थीं, तो हमारे लिए भी होंगी; नहीं तो फिर उनके लिए कैसे? लेकिन आज हम उसे क्या बोलते हैं? पाखंड। अगर आप कहते हो गंगा एक पानी है, कुछ नहीं है, तो फिर आप संत रविदास के शब्दों को झूठा कर रहे हो — कहानी तो झूठी हो गई ना, क्योंकि उन्होंने खुद सिद्ध किया था, एक कंगन उन्होंने कठौती से निकाल के दिया था।
(खोज क्यों ना करूं —) ना कहके सीधा रुक जाना — इसका कोई जीवन में मतलब ही नहीं। और इतने लोगों ने कहा है, तो कुछ तो बात होगी। अब देखिए, लोग कहते हैं मंदिर में क्या है, पत्थर की मूरत है, ये कुछ नहीं है; लेकिन फिर वही (लोग) रामकृष्ण परमहंस की कहानी सुनाते हैं कि मां को भोजन कराते थे। तो ये दोनों बातें कैसे लागू होती हैं? एक तरफ कह रहे हो सब पाखंड है, एक तरफ कह रहे हो नरसिंह मेहता के पास कृष्ण भगवान आते थे, उनके बच्चों की शादी भी कराई; मीरा के लिए आए। बात कुछ समझ में नहीं आती। इस समय हम दोहरा चलते हैं — एक तरफ कह रहे हैं गंगा मां पाखंड है, ये तो जल है; एक तरफ संत रविदास की कहानी भी सुनाते हैं। दोनों बातें मेरे जीवन में कैसे हो सकती हैं?
मेरे पास लोग आते हैं, कहते हैं राम ने ऐसा किया — रुको, रुको, रुको! राम के बारे में बात करने से पहले मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूं — रामायण सच्ची घटना है, हां या ना? बोले ना, तो बोला — बात क्यों कर रहे हो फिर, राम कहां से आए? जब आपके लिए रामायण है ही नहीं, तो आप मुझसे किस आधार, किस बेस पे राम के बारे में पूछ रहे हो? पहले आप बताओ कि रामायण को आप सच्ची घटना मानते हो, तब राम के विषय पे बात की जाए; और जब रामायण सच्ची घटना है ही नहीं आपके लिए, तो रामायण पे बात क्यों करना, एक झूठी कल्पना पे क्यों बात करना? क्योंकि तुम्हारे लिए तो कल्पना है ना — तो मैं अपना समय नहीं बर्बाद करना चाहता तुम्हारे साथ। तो मैं यह कहना चाहता हूं कि संत रविदास (के बारे में) — हमारे सामने दोनों कहानियां फेंकी गई हैं, और दोनों पे हमने ताली बजाई है। एक कह रहा है कोई देवी-देवता नहीं होते; फिर वही चिल्ला के कह रहा है कि रामकृष्ण परमहंस के लिए मां काली आईं — उसमें भी हम ताली बजाते हैं। हम इतने ज्यादा सोए हैं! आप देखो, एक आदमी तुम्हारे सामने दोहरी बात कर रहा है, और दोनों में आप ही ने हां कहा। एक तरफ कह रहा है गंगा मां होती नहीं, एक तरफ फिर 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' फेमस है। अब देखिए, वही लोग, संत रविदास जी को मानने वाले — एक तरफ कह भी रहे हैं कि मां गंगा को उन्होंने कठौती में बुलाया, और एक तरफ कह रहे हैं (वो) तो पानी है। एक ही आदमी दो बात कर रहा है — बहुत भ्रमित हैं लोग। और ये गुरु लोग कहानी सुना रहे हैं आपको — आपका गुरु (दोहरी बात कर रहा है), और आप दोनों में हां कह रहे हो।
(साधिका ने कहा, भ्रमित तो मैं ही हूं, इतनी हिम्मत नहीं कि खड़ी होकर पूछूं —) या तो अगर मां काली नहीं हैं, तो किसी के लिए नहीं हो सकतीं; गंगा अगर नहीं है, तो फिर किसी के लिए नहीं हो सकती; अगर हैं, तो सबके लिए हैं — फिर हमें उस लायक बनना पड़ेगा। (प्रश्न पूछना) क्या विरोध है? ये विरोध नहीं है — हम कुछ जानना चाहते हैं, हम कुछ समझना चाहते हैं। आप अगर बताने के लिए बैठे हो, तो बताओ; अगर नहीं बताना था, तो आप बैठे फिर क्यों? हमारा भी समय बर्बाद किया ना। ऐ डॉक्टर, क्लीनिक खोल ले और (कहे) मैं इलाज ही नहीं करता — तो तू क्लीनिक क्यों खोला है? बंद कर! क्योंकि तुम्हारे एक बोर्ड लगाने से मेरा समय इतना बर्बाद हुआ; जब तुझे कुछ आता ही नहीं, तो क्लीनिक खोलने की क्या जरूरत थी? बंद कर दे, मेरा समय तो बर्बाद नहीं होता। आप अगर कुछ बताने के लिए बोल रहे हैं, तो आपका कर्तव्य है, दायित्व है, जिम्मेदारी है — आप उसे बताओ, नहीं तो बंद करो। इसलिए तो मैं बोलता हूं कि आओ, हम आपसे प्रत्यक्ष बात करेंगे और आपके हर प्रश्न का उत्तर देंगे — जिम्मेदारी से देंगे, दायित्व से देंगे, आपका समय बर्बाद नहीं होने देंगे। लेकिन आप ऐसे ही घूमने आओगे, घूम के चले जाओगे (तो नहीं)। आपके प्रश्न में मुझे जिज्ञासा दिखनी चाहिए कि आपको उत्तर चाहिए। तो आपके सामने दोहरी कहानी सुनाई जा रही है, और अपने समाज के लोगों को बहुत समझदार कहते हैं — वो लोग दोहरी कहानी पे चल रहे हैं।
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