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प्रश्नोत्तर P4-0184 · भाग 4

(कुटिया में साधिका) मुझे द्वंद्व आ रहा है कि भगवान का अपना खुद का कोई अस्तित्व नहीं है — भक्तों ने ही उसे पॉपुलर किया। जैसे मीरा ने पूरी जिंदगी दी, तो हम मीरा को देखकर उस सुप्रीम को देख पाते हैं। अगर बीच में भक्त ना हो, तो भगवान को कौन जानेगा? क्या भगवान भक्त पर निर्भर है?

जैसे मान लीजिए विद्युत है — तो खोज के पहले किसी को नहीं पता था, खोज के बाद सबको पता चल गया। क्या उन्होंने (बिजली) पैदा की? उन्होंने खोज की, वो पहले भी मौजूद थी। एक भक्त भगवान की खोज करता है — वो पहले से था, पहले से मौजूद था; उसने पैदा नहीं किया, उसने अपनी जरूरत में खोज की। आज अगर हम कुछ खोज करते हैं, तो हमारी जरूरत — आवश्यकता विकास की जननी (है); तो वो पहले से मौजूद है। हम कुछ नया खोज नहीं करते; नया हमारे लिए इसलिए है कि मैं जानता नहीं था, लोग जानते नहीं थे। उसे हमने पैदा नहीं किया। हमें लगता है मैंने खोज की। आपको पता नहीं था, अब पता चल गया। नहीं पता था, तो भी था; पता चल गया, तो भी है। (भगवान-परमात्मा के लिए) भक्त हमारे लिए एक मार्गदर्शक है, प्रेरणादायक है, प्रेरणा का स्रोत है — लेकिन वो (परमात्मा) पहले से मौजूद था। तो भक्त हमारे लिए प्रेरणादायक हैं, और वह (परमात्मा) पहले से मौजूद था। वो रास्ता हमें पता नहीं था, हम लोगों को पता नहीं था; एक ने खोज कर दी, लेकिन वो पहले से था। उसने कुछ नया खोज नहीं की, लेकिन हम लोगों के लिए नया है। यहां सब पहले से मौजूद है, यहां कुछ नया खोज हो ही नहीं सकता — है, तभी ना खोजा। तो पहले से है, आपको बस पता नहीं था; और आप कब खोजे? जब आपको जरूरत लगी। कुछ साल पहले लकड़ी से भोजन बनता था, फिर कोयला आया; पहले तो कच्चा ही खाते थे, फिर धीरे-धीरे इधर आए; अब देखो गैस की खोज हो गई। अब धीरे-धीरे, जैसे-जैसे आपको जरूरत (होगी), एक खत्म होगा, आप एक (और) खोजने लगोगे, क्योंकि जीना है। तो पहले से मौजूद था, कोई नया खोज थोड़ी ना हुआ — हमें लगता है कि नया है; नया नहीं है, यहां नया कुछ भी नहीं है। आपको पहले जानकारी नहीं थी, अब पता चल गया। खोजो। सीधा ना 'ना' में जाओ, ना 'हां' में जाओ। ना-हां में संख्या बहुत है, क्योंकि ना-हां में आपको एक झुंड मिलता है — चाहे ना में जाओ, चाहे हां में जाओ, किसी में तुम चले जाओ। लेकिन ना-हां से परे उठकर खोज करना — इसमें आपको अकेले चलना पड़ेगा, आपके साथ कोई नहीं आएगा। जब आप कुछ खोजना चाहोगे, तो आपको अकेला ही चलना पड़ेगा, कोई साथ नहीं आने वाला है। उनके लिए (बस) कल्पना है, क्योंकि हां-ना — बस खत्म; 99% लोग इसी में जीते हैं। (ना-हां में) झुंड का बल है ना; (पर) वो टाइम आएगा, तो देख लेंगे ना — अकेले पैदा हुए हो, अकेले मर जाओगे। ज्ञान तो सबको है — क्या लेके आए थे, क्या लेके जाओगे — तो लूट क्यों रहे हो फिर? इसीलिए तो (कहता हूं) ना और हां में भीड़ है, क्योंकि (उसमें) कुछ करना नहीं पड़ता — बस ले लिया झंडा, (और चल दिए) पीछे-पीछे।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17