प्रश्नोत्तर P4-0083 · भाग 4
(लाइव) प्रणाम योगी जी। क्या वास्तव में कोई ऐसी अवस्था है जहां दुख, बंधन और अज्ञान पूर्णतः समाप्त हो जाते हैं और केवल शांति, ज्ञान और आनंद ही शेष रहता है?
एकदम — जब कुछ नहीं चाहिए। क्योंकि 'कुछ चाहिए' में सुख है, दुख है — आपके तरीके से मिल गया तो सुख, नहीं मिला तो दुख। और 'चाहिए' से मुक्त हो गए तो ना सुख है, ना दुख है — परम आनंद है। तो ऐसी स्थिति है। सिर्फ उसमें अगर आप हो (तो)। अगर कोई और है, तो जैसा वह है, वैसा प्रभाव — जिसके साथ आप जी रहे हो, उसका भी तो प्रभाव पड़ता है हमारे ऊपर। तो आप किसके साथ हो? और अकेले भी हो तो क्या पूरे अकेले हो? पता चला शरीर से अकेले हो, लेकिन मानसिक आपकी भीड़ है अंदर, राग-द्वेष की — तब थोड़ी ना परमानंद समझ में आएगा। जब आप पूर्णतः अकेले हो जाते हो — जहां कुछ भी नहीं है, सिर्फ (आप) — (तब)।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25