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प्रश्नोत्तर P4-0073 · भाग 4

(लाइव) गुरु जी प्रणाम। सब कुछ जान लेने की इच्छा क्यों रहती है? क्या आत्मज्ञानी सर्वज्ञ हो जाता है? क्या जानने से मुक्त हो जाता है?

देखिए, यहां आप क्या जानोगे, बताओ? जिसको आप जानना चाह रहे हो, प्रतिपल बदल रहा है, प्रतिपल। तो क्या जानोगे? आप जानने का प्रयास ही करते — जैसे ही आपने जानने का प्रयास किया, वो बदल चुका है। तो आप यहां कुछ जान नहीं सकते। आप सिर्फ — काश — उपयोग करते। जितना मेरे शरीर की जरूरतें हैं, जितने में मैं इस शरीर में रह सकता हूं, इस शरीर के साधन के लिए जानने का प्रयास करते, अपने लिए नहीं। इस शरीर में मैं कैसे सुरक्षित रह सकता हूं — (बस इतना)। आपके लिए यहां जानने के लिए कुछ है ही नहीं। क्या जानना चाहोगे, बताओ? इस सृष्टि में क्या ऐसा है कि आप जान के रुक (जाओ)? हमें सिर्फ इतना जानना है कि इस शरीर का भरण-पोषण मैं कैसे करूं। सिर्फ इतना जानना है, और फिर मुझे जानने से मुक्त होना है। क्योंकि जानने की इच्छा भी एक नशा है, और हम इस एक नशे के आदी हो गए हैं। यहां तक कि हम रास्ते में चल रहे हैं — कोई मतलब नहीं है — ट्रेन में, बस में हम बगल वाले को हमेशा जानना चाहते हैं। कोई मतलब भी नहीं है, कोई बातचीत भी नहीं है, उससे कुछ मिलने वाला भी नहीं है। हम देखो तो हर वक्त जानना चाहते हैं। लेकिन क्या जानना चाहते हो? क्या करोगे जान के? तो ये एक और परिचय बनाना चाहते हो, क्यों? व्यवस्थाओं के लिए — कोई अच्छा परिचय होगा, मजबूत होगा, तो आपको कोई सपोर्ट मिलेगा। बहुत बार तो हमारी इतनी गंदी आदत हो चुकी है — ये बस हमारी खुजली है दिमाग की, वो टिकने नहीं देती है। जैसे अभी एक फोन आया था, राजस्थान से। तो वो कहे, मैं आना चाहता हूं। आ जाओ। बोले, रहने की व्यवस्था है? तो मैं बोला — जब मैं रह रहा हूं, तो पूछने की क्या जरूरत है? मैं रह रहा हूं तो व्यवस्था में ही तो रह रहा हूं। जब तू किसी से मिलने जाएगा तो वो रह रहा है तो आपको भी रखेगा — पूछने की क्या जरूरत है? तो हम वो जानना चाहते हैं जिसका जीवन में कोई मतलब ही नहीं है। अभी जैसे ये महाराज जी हैं — मेरा सबसे आत्मिक लगाव है, इनसे भी एक आत्मिक लगाव है। यह जब से सन्यासी हुए हैं, ये जीवन में पहली बार ऐसे बैठे होंगे। ये मैं आपसे भी बोला, मैं अभी भी बोल रहा हूं — अगर ये ऐसे शुरुआत से ही बैठे होते, तो ये क्या होता? व्यवहार में चले जाते हैं। अगर ये शुरुआत से बैठे होते, तब तक कल्याण इनका (हो जाता)। मोक्ष तो लेनदेन के बाद होगा, लेकिन आत्मज्ञान आपके बस में है। आप क्यों नहीं इस बात को समझते हैं? किस्मत, भाग्य क्या है? आपका किया गया कर्म।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25