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प्रश्नोत्तर P11-0167 · भाग 11

घर से निकलने के बाद शरीर से तो भाग लेते हैं, पर गृहस्थ के 20-50 साल का राग-द्वेष, यादें साथ चलती रहती हैं। वैराग्य कैसे हो?

वैराग और वैराग्य अलग-अलग हैं। वैराग हुआ — मुझे लगा कि जहां मैं जी रहा हूं, वहां खुश नहीं हूं, अपना जीवन गंवा रहा हूं। फिर समझ विकसित हुई — शास्त्र, जीवंत गुरु या किसी वाणी से — कि निकलने के लिए राग और द्वेष से मुक्त होना है; राग-द्वेष से मुक्त होना वैराग्य है। राग-द्वेष जाएगा अपनी समझ से। जैसे-जैसे समझ विकसित होगी, जिन्होंने दुर्व्यवहार किया उन्हें माफ करते जाओगे कि हमारा लेना-देना था, खत्म करो; समझ आएगी कि मैंने भी कभी सताया होगा। एक झटके में नहीं हटेगा — जितना गहरा कपड़े पे दाग, उतनी धुलाई करनी पड़ेगी, उतना इंतजार। आगे राग लगाओगे नहीं; पीछे ज्यादा प्रॉब्लम द्वेष वालों से है, उन्हें धीरे-धीरे माफ करते जाओगे। जैसे-जैसे सत्कर्म करोगे, मोह खत्म होगा; सामने वाले से लेने की इच्छा का त्याग करोगे, तो मोह होगा ही नहीं।

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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11