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प्रश्नोत्तर P11-0166 · भाग 11

अगर हम पहले कभी मूल में (पूर्ण) थे और फिर भी अपूर्ण हो गए, तो पूर्ण होने के बाद भी क्या फिर अपूर्ण हो सकते हैं? तब तो यह चलता ही रहेगा।

इच्छा-अपेक्षा का त्याग करके वह इस भवसागर से निकलेगा; लेकिन वह इतना तो स्वतंत्र है कि जब चाहे फिर इच्छा में आ सकता है। जैसे एक सामान्य व्यक्ति अपराधी बना — उसे पता था अपराध करने से क्या मिलेगा, यही तो स्वतंत्रता है। अगर पूर्ण से अपूर्ण में नहीं आ सकते, तो यह तो गुलामी हो गई। अपराध किया तो कैदी हुए, सजा काटकर फिर सामान्य हुए, फिर चाहो तो कैदी हो सकते हो — यह चलता नहीं रहेगा, यह आपके ऊपर है। जैसे (ये साधक) — क्या इन्हें नहीं पता था कि बेईमानी अपराध है, उसका परिणाम क्या है? फिर भी किया, शांति से अशांति में अपने आप को ले गए; गलती हमारी है।

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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11