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प्रश्नोत्तर P11-0168 · भाग 11

सब कहते हैं ध्यान में जो विचार आएं उन्हें देखो, दृष्टा बनो — पर दृष्टा बना नहीं जा रहा। 15 साल से एक बात (चोट) है जो जा ही नहीं रही; सात समुंदर पार भागा, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा। क्या करूं?

दृष्टा ऐसे नहीं बन पाओगे। वही विचार परेशान करते हैं जिनसे मेरा लेना-देना है, राग और द्वेष है; बहुत विचार ऐसे हैं जो परेशान ही नहीं करते — 1 लाख की भीड़ निकल रही हो, उसमें परेशान वही करेगा जिससे राग या द्वेष है। विचार किसी रूप का ही आता है — व्यक्ति, धन, संपत्ति, वैभव; रूप से परे विचार नहीं आ सकता। तो उस विचार पर काम करो कि इससे राग-द्वेष क्यों है, और गहराई में अंत तक जाओ, जहां से राग-द्वेष पैदा हुआ होगा; अंत तक जाओगे तभी अपने आप को वहां से निकाल पाओगे। विचारों को सिर्फ देखो नहीं — जिन विचारों से पीड़ा हो रही है, उन पर काम करो कि पीड़ा क्यों है। (एक ही विचार है तो भी) — नाव में एक छेद हो चाहे 99, खड़े तो वहीं हो।

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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11