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प्रश्नोत्तर P10-0187 · भाग 10

(कुटिया में साधक) कल मेरे मन में भाव आ रहा था कि मैं (नर्मदा) परिक्रमा कर लूं। पर लगता है यह जगह, आपका सान्निध्य छूट जाएगा।

अब देखो आपको लाभ किसमें होगा। अगर आपको लग रहा है कि इससे ज्यादा लाभ भ्रमण में होगा, तभी इसको छोड़ो। आप अपना लाभ देखो कि मेरा कल्याण किसमें है। जीव-जंतु सबको अपना हित पता है — चूहा उतना ही बिल बनाता है जितने में बिल्ली ना जाए। जब एक जगह को छोड़ो तो कभी भी ज्यादा के लिए ही छोड़ना, और बहुत सोच-समझ के छोड़ना, कम के लिए कभी मत छोड़ना। भ्रमण इंद्रियों के सुख के लिए — अलग-अलग भोजन, अलग-अलग लोग, गप्पें — नहीं; जिस उद्देश्य से भाव हुआ, उसी उद्देश्य से करो, उसके अलावा और कोई बात ना करना। अपने मान के लिए, अपना बैकग्राउंड बताने के लिए भ्रमण मत करना; सीखने के लिए करना। यह जगह तो रहेगी, भ्रमण करके आओगे तो भी रह सकते हो। अगर लग रहा है, तो कर लेना चाहिए, ऐसा ना हो कि इच्छा ही रह जाए।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 8 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-08