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प्रश्नोत्तर P9-0178 · भाग 9

समझ विकसित हो रही है और उथल-पुथल भी है। इसे संभालते हुए चल रहा हूं। बाद में फिर कहा कि इधर-उधर चला जाता हूं, जब गड़बड़ाता हूं तो खुद पता चल जाता है, दो-चार दिन में वापस उसी स्थिति में चलने लगता हूं, और आपके आगमन पर नजर पड़ते ही वापस उसी स्तर पर आ गया। क्या यह ठीक चल रहा है?

यह आप ही को पता होगा, और किसी को नहीं पता होगा, समझ में आ रहा है और उथल-पुथल भी है। उथल-पुथल को संभाल रहे हैं। एकदम। उथल-पुथल तो है ही। संभालते हुए चल रहे हैं। संभालते रहो। संभालो, और उससे निकलो। क्यों उथल-पुथल है, उसको हटाइए। उसको हटा के ही चलो। उससे आप अपने आप पर बने रहिए। शरीर से प्रतिक्रिया मत दीजिए। तो आप ऊपर बढ़ते जाओगे। आपका स्तर ऊपर बढ़ता जाएगा। अभी बढ़िया। जैसे ही नजर पड़ी, वैसे ही वापस उसी स्तर में आ गए। लगे रहो। कल्याण करो।

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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16