प्रश्नोत्तर P7-0144 · भाग 7
नाम जप साधक के लिए क्या काम करता है? मैंने पढ़ा है, अनुभव नहीं है। क्या नाम जप गलत कामों से बचाता है? संतों ने कहा है कि आत्मा नीचे धंसी पड़ी है, ऊपर आकर तीसरे तिल, आज्ञा चक्र पर आती है, और वहां परमात्मा में लीन हो जाते हैं। गुरु नानक देव जी बार-बार नाम जपने को कहते हैं। नाम, शब्द क्या है?
गुरु नानक जी बता चुके हैं ना। क्या वे पूरा बता के नहीं गए? क्या उन्होंने मेरे लिए छोड़ दिया है? क्या गुरु नानक जी ने मेरे लिए यह छोड़ दिया है कि नाम जपो, नाम जपो, और नाम हमारे लिए छोड़ दिया कि तुम आकर सबको बता देना कि नाम ऐसा होता है? जब आप गुरु नानक को सुन रहे हो, तो गुरु नानक को पूरी तरह सुनो। गुरु नानक जी अगर बोलें नाम जपो, नाम जपो, तो नाम जप भी बताए होंगे। ऐसा तो नहीं कि मेरे लिए छोड़ गए हैं, कि तुम आना और सबको नाम जप देना।
वे शब्द डिस्चार्ज हो चुके हैं। उस शब्द को चार्ज करने के लिए कोई पूर्ण गुरु चाहिए, तो उसको ही क्यों चार्ज कर रहे हो? जब मैं शब्द कुछ लेकर आया हूं, तो उसको ले लो ना। तरीके अलग भी हो सकते हैं, पर है वही। मैं उनके शब्द चार्ज करूं, या मेरे अंदर से जो शब्द आ रहे हैं, वे दूं? जो आपके सामने शब्द है, आप उस पर चलो ना।
एक व्यक्ति से आप पता पूछ रहे हो, और उसने आपको पता अच्छे से बता दिया। और आप कह रहे हो कि नहीं, एक जन ने मेरे को और पता बताया था। तो उसका समय क्यों बर्बाद कर रहे हो? आपसे कोई पता पूछे, और आपने बड़ी ईमानदारी से पता बता दिया, और वह कहे कि नहीं, उन्होंने तो इस तरीके से बताया था। तो आप क्या करोगे? अपना काम करोगे, या उसको समय दोगे? जिसने बताया, उसके बताए पर मैं काम करूंगा। आपने किसी व्यक्ति को रास्ता बताया, और वह आपकी बात सुनने के बाद बोले कि मेरे को और लोगों ने भी रास्ता बताया है, और आपको सुनाने लगे। तो क्या आप खड़े होकर सुनोगे?
ऐसा मत करो, कि आपको भी भगाना पड़े। इस बात को समझो। पहले मैं सोलह-सोलह, अठारह घंटे सत्संग करता था। लेकिन लोग समय पास करते थे। कुछ भी पूछते थे, कोई मतलब ही नहीं था। इसलिए अब मैंने सत्संग करना एकदम कम कर दिया। पहले के वीडियो देखो। यहां लोग रहते थे, उन्हें पता है। सोलह-अठारह घंटे में आदमी सोता क्या था। खुद बनाता था, खाता था। अभी भी बनाता हूं, खा रहा हूं। लेकिन लोगों ने ऐसे ही टाइम पास किया, तो हमने सत्संग कम कर दिया, जितना कम हो सके। कल तुम जाने वाले थे, और कुछ लोग थे, इसलिए मैंने आज ले लिया। नहीं तो मेरी इच्छा नहीं थी। क्योंकि वही फालतू के लोग प्रश्न करते हैं, टाइम पास के। अगर आप मूल पर बात करो, बस। कुछ ना कुछ बकना नहीं है। हमें एक ही प्रश्न पूछना है, जितना हमारा प्रश्न है, क्योंकि मुझे जाना है।
अगर गुरु नानक जी के शब्दों से जा रहे हो, तो जाओ, और किसी से मत पूछो। नहीं तो मिक्स हो जाएगा सब। और अगर आपको कोई मिला है, तो उसका पूछो। और जिसका आपको समझ में आ जाए, वो शब्द ले चलो। तुम्हें इस भवसागर को पार करना है। आपको आत्मिक कल्याण करना है। हमें कोई व्यक्ति विशेष को नहीं पकड़ना है। हमें शरीर को नहीं पकड़ना है। हमें शब्द ले चलना है, जिसका शब्द समझ में आ जाए।
भाई, आपको दो लोग पता बता रहे हैं। एक की भाषा समझ में आ गई, वह आपकी भाषा में, ठेठ बता रहा है। और एक का समझ में नहीं आ रहा है। तब क्या करोगे? क्या कहोगे कि नहीं, इसी का कोई और समझाए? हमें तो अपनी जगह पर पहुंचना है ना। हमें कहां पहुंचना है? अपनी जगह पर पहुंचना है। हमें भाषा समझनी नहीं है, हमें जगह पर पहुंचना है। तो अगर मैं आपको बता रहा हूं, कर्म के सिद्धांत को समझो। जैसा आप करोगे, वैसा बनते चले जाओगे।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12