प्रश्नोत्तर P7-0085 · भाग 7
गर्मी लग रही है, इसलिए गंजी उतार दी। कहा था पहनो, पहनी हुई थी। अब क्या करें, गर्मी है। नंगे भी हो जाएंगे। तौलिया भी निकाल देंगे। आप भी तो पहने हो, सब पहने हैं। फिर क्यों निकाली? दो लोग पहने हैं, तो मेरे लिए अलग व्यवस्था क्यों?
मैंने कहा था, गंजी पहनो। पहनी हुई थी। तो क्या करें, गर्मी लगे, तो नंगे भी हो जाओगे। अभी तौलिया भी निकाल दोगे। पूछो क्यों। बोलोगे, गर्मी लग रही है। नंगे हो जाओ। निकाल दो। हम भी तो पहने हैं। फिर वही बात। सब तो पहने हैं।
आपको मना किया था, या नहीं किया था। तो क्यों निकाली। फिर वही बात। कुछ देर में तुम बोलोगे, गर्मी है, नंगे हो जाओगे। क्यों हुए। गर्मी लग रही है। ये कोई बात होती है क्या। और सबको गर्मी नहीं लग रही। लगता है, तुम्हारे लिए अलग व्यवस्था है। दो पहने हुए हैं, तो क्यों दो पहने हैं। वो तुम्हारा टेंशन है। तुम चार पहन लो। इसके लिए दो क्यों पहने हैं।
आप जरा बात समझिए। अगर एक बार कुछ बोल दिया गया, तो दोबारा रिपीट मत करवाइए। ये पहने हैं, इनको कर देंगे। इनके नीचे क्या है। इनके नीचे एसी है। तुम्हारे नीचे क्या, हीटर है। बात को समझिए। अगर एक बार कोई बात बोल दी गई, तो फाइनल होनी चाहिए। ऐसे निकालूंगा, वो निकालूंगा। आप देखो, आप चार भी पहनो। लेकिन जैसी व्यवस्था दी गई है, जितना नियम है, उसमें जियो।
फिर वही सफाई दे रहे हो। गलती की या नहीं की। स्वीकार क्यों नहीं कर रहे। अभी तो गलती हुई। अभी गर्मी का क्यों। फिर वही गर्मी। हम गर्मी में नहीं खड़े हैं क्या। ये नहीं खड़े हैं क्या। क्यों नहीं समझ रहा बात को। सफाई पर सफाई दिए चले जा रहे हो। क्यों। गर्मी का। मतलब सब नंगे हो जाएं। हां, गर्मी का मतलब सब नंगे हो जाएं। हम भी हो जाएं, और कहें गर्मी लग रही है।
तुम ही एक एयर कंडीशन में रहकर आए हो। बाकी तो सब गर्मी में रहकर आए हैं। इतना एयर कंडीशन में मत जाओ। क्या साधोगे अपने आप को। यहां गर्मी लग रही है। मुझे तो जरा सा भी नहीं लग रही। और लग रही है, तो लग रही है। इन्हें नहीं लग रही, इन्हें लग रही है। जरा समझो। सहना सीखो। फिर कैसे कल्याण होगा। जरा सा पसीना बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। फिर आगे अस्तर कैसे उठाओगे। बताओ। ऐसे थोड़ी अस्तर उठता है। बहुत अपने आप को लगाना पड़ता है। जरा सा पसीना आया, गंजी निकाल दी। क्या साधना करोगे।
और हमने मना किया था। तुम्हें पर्सनली मना किया था। फिर उसके बाद नहीं किया। मैं कैसे मानूं। तूने मेरे सामने ही कर दिया। फिर वही बात। तूने मेरे सामने ही किया। उसके बाद किया या नहीं किया। मेरे सामने ही तो किया। अभी आज मैं आया, आपके सामने किया, और फिर भी बोलना पड़ रहा है।
इसलिए मैं आपसे एक ही बात कहूंगा। अगर साधना करने गए हो, तो पूरी तरह साधक बनो। जितना कह दिया गया, एक प्रतिशत भी इधर-उधर मत करना। अगर अस्तर उठाना है, तो पूरी तरह सिस्टम को समझो, और उसमें जियो। तब देखो, आपका अस्तर कैसे उड़ता है।
अगर कोई नियम, कोई सिस्टम बनाया गया है, तो ऐसे ही थोड़ी बनाया गया है। ऐसे ही रख दिया गया हो, ऐसा नहीं। उसमें कुछ तो रहस्य होगा। जब उसमें जिओगे, तब समझ में आएगा।
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वीडियो: किसी को सुधारने के लिए सुधारक को कितनी मेहनत करनी पड़ती हैं ? #yogiji_ka_satsang · 2025-06-27