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प्रश्नोत्तर P7-0083 · भाग 7

अपनी जिंदगी की क्लैरिटी क्यों नहीं हो पा रही? अंदर गुणों की ताकत नहीं है, शारीरिक बल नहीं है, अधूरापन है, कमियां हैं। जिन पर काम नहीं करना चाहता, उन्हें ढक रहा हूं। भाई कवर कर ले, इधर से कुछ मिल जाए। जहां कमी है, वहां पचहत्तर बार नमस्ते करूंगा, घरवालों की चापलूसी करनी पड़ती है। आज परिवार के साथ, कल पति-पत्नी के साथ, फिर बच्चों के साथ, दादा-दादी बनने तक वही कमजोरी रह जाएगी। जन्म-जन्म डर-डर कर क्यों जी रहे हैं? मैं आपसे डर रही हूं, आप मुझसे डर रहे हो, बात ही नहीं हो रही। कोई किसी को डरा क्यों रहा है?

कमी रहेगी। आज परिवार के साथ कर रहे हो। कल पति-पत्नी के साथ। फिर बच्चों के साथ। फिर दादा-दादी बन जाओगे। तब भी वो कमजोरी तो काम नहीं करेगी। फिर कब करोगे। वो कमजोरी हमेशा बनी रहेगी। कितना भी छुप लो। कोई किसी को डरा नहीं रहा है। हमें कुछ उम्मीदें हैं। वो उम्मीदें हमें डरा रही हैं। सीधी बात है। कोई किसी को डरा नहीं रहा। हमें उम्मीदें हैं। वो डराके रखे हैं। और उम्मीद योग्यता से ज्यादा है। अगर योग्य होते, तो उम्मीद इतनी ज्यादा नहीं रखी होती। हम उस काबिल नहीं हैं, और उम्मीद रखी हुई है। वो डराके रखे है। इसलिए मैं कहता हूं, योग्यता से ज्यादा पाई हुई इच्छा का त्याग कर दो। बात खत्म। और भविष्य में भी मैं वो करना नहीं चाह रहा, इसलिए डरा-डरा नहीं हूं। करने की सामर्थ्य नहीं है। न करने के दो मतलब होते हैं। एक, आप कर नहीं सकते। और एक, आप करने लायक हो, और करना नहीं चाहिए। दोनों बातें होती हैं। बेईमान क्या करे। दिख रहा है। मुझे उसी में मजा आ रहा होगा। इसलिए भी घूम रहा है। और मैं निकल भी नहीं पा रहा।

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वीडियो: किसी को सुधारने के लिए सुधारक को कितनी मेहनत करनी पड़ती हैं ? #yogiji_ka_satsang · 2025-06-27