प्रश्नोत्तर P7-0046 · भाग 7
आम आदमी का अग्निदाह और साधु-संत का मिट्टी में दाह क्यों करते हैं?
यह तो करने वाले बताएँ। हमने तो ऐसा आज तक कुछ किया नहीं। और मैंने अपनी कोई योजना भी नहीं की है। मेरे पास तो कुछ कागज भी नहीं है। जहाँ गया, गया। पता नहीं। लोग शरीर का क्या करेंगे, वह जाने। हमें तो मतलब ही नहीं है।
देखिए, मेरा शरीर तो है नहीं। मुझे मिला है। मैं इसमें से निकला हुआ हूँ। जिसका है, वह जाने। सीधी सी बात है। किसको गाड़ना है, किसको जलाना है, किसको खिलाना है। बात समझ रहे हो।
अब मैंने टिकट कराया। मैं डिब्बे से उतरने वाला हूँ। तो मुझसे पूछोगे, सीट का क्या करोगे। सीट मेरा था क्या। सीट तो जिसका था, वह जाने। दूसरों को देगा। हम कौन होते हैं निर्णय करने वाले। सीट का क्या होगा। इस शरीर का क्या होगा। हमसे क्या मतलब। प्रकृति जाने।
जब तक यह मिला है, मुझे ईमानदारी और सत्कर्म का जीवन जीना है, परम सत्य तक पहुँचना है, शरीर के द्वारा। बस, खत्म।
भगवान अवतार लेता है या नहीं, तो भगवान बताएगा। सीधा उनसे बात करो।
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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13