प्रश्नोत्तर P7-0015 · भाग 7
ना करने में आपका अनुभव कैसे होता है? जब कुछ नहीं चाहिए, तब अनुभव कहाँ है?
ना करने में आप होते हो, फिर भी पता नहीं करने में क्यों भाग रहे हो। सीधा-साधा हमारे हाथ में है, फिर भी हम दूसरे के हाथ में देकर घूम रहे हैं, करवा दो, करवा दो।
ना करने में आपका अनुभव कैसे है, कैसे होता है? ना करने में आप हैं। बात इतनी है। ना करने में अनुभव कैसे आता? नहीं आता। कुछ नहीं है तो हम वहाँ अनुभव कहाँ हैं। आप कैसे हो। वही तो बात है। हम उसमें कहाँ हैं। हम तो उसमें तब होते जब मुझे कुछ चाहिए होता। अनुभव तो तब होगा जब कुछ चाहिए। कुछ नहीं चाहिए का क्या अनुभव। कुछ भी नहीं होगा। अनुभव भी नहीं होगा। आप कहाँ हो। उसका भी कैसे अनुभव हुआ। वही बात है। जब कुछ भी नहीं, तो हम भी नहीं हैं। एकदम।
जैसे आपने कहा, यह तुरंत मेरे में आ गया ना। बोलते ही मेरा आता है। हमसे बाहर। जैसे कुछ हुआ, वह मेरा। आप अंदर भी बोल रहे हो तो मेरा आ गया ना। अंदर बोलो, चाहे बाहर बोलो। मेरे से ही संबंध बनेगा। हमने व्यक्त किया तो मेरा ही है वह। पहली बात तो व्यक्त होगा ही नहीं। व्यक्त हुआ, मेरे से हुआ। अगर व्यक्त हुआ तो फिर आप मेरे में हो। अगर आपने बताया तो आप मेरे में हो।
अगर आप देखेंगे तो स्थिति का वर्णन भी नहीं हो सकता। वर्णन नहीं किया जा सकता। कोई स्थिति ही नहीं। स्थिति का भी तो दायरा है।
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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13