प्रश्नोत्तर P6-0160 · भाग 6
अनीता यादव पूछती हैं, सौभाग्य और दुर्भाग्य में क्या अंतर है?
सौभाग्यशाली मैं उसे इस दुनिया में समझता हूँ, जो अध्यात्म को समझते हैं। और दुर्भाग्यशाली मैं उन्हें समझता हूँ, जो समझने के बाद भी यात्रा नहीं करते। दुनिया के सबसे दुर्भाग्यशाली वे व्यक्ति हैं, क्योंकि पृथ्वी पर बहुत ऐसे हैं जो अबोध हैं, पागल हैं, मंदबुद्धि हैं, जिनको अध्यात्म समझ में ही नहीं आता। ये तीनों नहीं हैं, तो भी बहुत ऐसे परिवार हैं, जैसे आपके लोग हैं, जिन्हें समझ में नहीं आता। उनकी बात अलग है। कम से कम आप अपने आप को समझ पा रहे हो। अध्यात्म को समझ रहे हो, तो निकल लो।
मैं दुर्भाग्य और सौभाग्य इसी को समझता हूँ। यह आपका सौभाग्य है कि आपके पास समझ है। दुर्भाग्य यह है कि आप नहीं चल पा रहे। नहीं चलना आपका दुर्भाग्य है।
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