प्रश्नोत्तर P6-0107 · भाग 6
बैठते ही अपने आप ज्ञान की बातें उठने लगती हैं। पहले केंद्र पर लोगों के प्रश्नों का जो उत्तर दिया, अब लगता है उससे बेहतर उत्तर देना चाहिए था। ऐसे विचार आते हैं तो क्या करूं?
बस अपने आप में रहिए। अपनी स्थिरता बनाए रखिए। मेरा आशीर्वाद पूरी तरह है। मैंने अभी भी कहा है। मेरे प्राण भी अगर आप लोगों के कल्याण में लग जाएं, तो उसे भी मैं कम समझता हूं। कम इसलिए समझता हूं कि प्राण तो जाने वाला ही है। यह जाने वाला है। तो क्यों ना आप लोगों के कल्याण में ही चला जाए। ऐसे भी तो चला जाएगा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 7 जून 2026 #योगी · 2026-06-07