प्रश्नोत्तर P6-0050 · भाग 6
अपने तरीके से ही चाहिए, यह चाहना भी अपने प्रति बेईमानी लगी। जरूरत है पर योग्यता नहीं है, तब क्या करें? जो बनकर मांग रहा हूं, क्या मैं वही हूं? सामने वाले को पता नहीं, मांगने वाले को पता है। रास्ता नहीं पता और बता दिया, या यह कह दिया कि मुझे पता नहीं, इनमें क्या फर्क है?
अपनी योग्यता देखो और अपनी जरूरत देखो। जरूरत है और योग्यता नहीं है, तो योग्य होने के बाद लो, तब नहीं फसोगे। योग्यता के बिना किसी तरीके से हासिल कर लिया तो फंस गए, क्योंकि तुम्हें पता है कि बेईमानी कर ली। जिससे मांग रहे हो, सामने वाले को पता नहीं कि जो बनकर मांग रहा है वह है भी या नहीं। मांगने वाले को पता है। मैं जो बनकर मांग रहा हूं, क्या मैं वही हूं? अगर वही हो, और सामने वाला वही समझकर दे रहा है, तो बंधन नहीं बढ़ेगा। हो कुछ और, बता कुछ और, तो देने वाले को उसके कर्म का फल मिल जाएगा, लेने वाला फंस गया, बेईमान हो गया।
जो बता रहे हो, वही होना चाहिए। यही ईमानदारी है। किसी ने रास्ता पूछा और रास्ता पता नहीं है, फिर भी बता दिया, तो बेईमानी है। तुम फंस गए, तुरंत गिर गए। इतना भी कह दिया कि मुझे पता नहीं, आगे पूछ लीजिए, तो स्तर उठ गया। भटका सकते थे, एक विकल्प था, पर ईमानदारी दिखा दी कि मुझे इसका ज्ञान नहीं है, वहां पूछ लीजिए। समझ विकसित होगी। हां हो या ना, ईमानदारी से बोलो। ना बोलने में भी स्तर उठता है, क्योंकि भटका सकते थे। कुछ कदम के लिए वह मान ही लेता, पूछा है, भरोसा है। जितने कदम तुम्हारे कहे अनुसार भटके, उसका दोष तुम्हें लगेगा।
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वीडियो: Sunday Q&A May 3, 2026 #Yogi · 2026-05-03