प्रश्नोत्तर P6-0047 · भाग 6
समाज में अलग अलग स्तर पर जो बताया जा रहा है, क्या वह केवल बॉर्डर तक पहुंचाने की कोशिश है, और बॉर्डर पर जो अवस्था घटेगी उस दिन सब छूट जाएगा? कौन सा मार्ग लूं, यह कैसे देखूं? एक समय ऐसा भी आता है जब मन में बहुत दुविधाएं उठती हैं और प्रश्न बहुत से उठने लगते हैं। उस समय क्या किया जाए?
जब लक्ष्य पर पहुंचोगे तो मार्ग छूट जाएंगे। जितने मार्ग हैं वहीं खत्म हो जाते हैं। मार्ग केवल लक्ष्य तक रहते हैं। जितने साधन बताए जा रहे हैं, वहां पहुंचने के हैं, बॉर्डर तक पहुंचने के हैं। लक्ष्य पर पहुंचे कि सब खत्म। ये सब एक एक मार्ग बता रहे हैं। अब देखना तुम्हें है कि कौन सा मार्ग समझ में आ रहा है।
कई लोग खड़े हैं, तुम्हें एक जगह जाना है। कोई हिंदी में बोल रहा है, कोई अंग्रेजी में, कोई मराठी में, कोई भोजपुरी में, कोई गुजराती में, कोई कर्नाटक की भाषा में। देखना है किसकी भाषा समझ में आ रही है। जिसकी भाषा समझ में आए, उससे बात करो। जिसकी भाषा का ज्ञान ही नहीं, वह सही भी बता रहा हो तो उसका सही बताना क्या करोगे। समझ में आना चाहिए। जिसकी बात समझ में आ जाए, उसी पर चलो।
जिसके बताए मार्ग पर चल रहे हो, दुविधा उठे तो उसी से पूछो। वह बताएगा। संपर्क करो, कहो कि मैं यहां से यहां तक जा रहा हूं और बड़ी दुविधाएं उठ रही हैं। जो वहां गया है उसे पता है कौन कौन से दृश्य आएंगे, कौन कौन सी चीजें आएंगी। वह बता देगा।
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वीडियो: Sunday Q&A May 3, 2026 #Yogi · 2026-05-03