प्रश्नोत्तर P6-0044 · भाग 6
निर्विकार बहुत ऊंची अवस्था है। विकार है, तो कभी निर्विकार भी रहे होंगे, तभी विकार हटाने का प्रयास है। स्वप्न की बात हो चुकी। उसके बाद कारण अवस्था आती है, जिसमें शरीर को विश्राम मिलता है और मन को विश्राम मिलता है। वह अवस्था क्या है? उसमें जाकर इंसान सब कुछ भूल जाता है, ऐसा लगता है। हम भी उतनी ही जानकारी तक जाकर खड़े हो जाते हैं, जैसे रोबोट मेमोरी के बिंदु तक छूकर लौट आता है। कहने को जागृत है, पर जागृत भी धोखा लगता है। मैं प्रकृति का ही हिस्सा हूं, फिर अपने को और प्रकृति को अलग क्यों समझें? फूल का एक पत्ता समझ में आ जाए तो फूल समझ में आ जाए, पर इसी को समझ नहीं पा रहे। समझ शरीर के माध्यम से ही हुई, जहां जहां गए ज्ञान होता गया, अपनाते गए, सानिध्य में काम किया, समझ भीतर विकसित होती गई। फिर भी कारण अवस्था का उत्तर नहीं मिला, जब ऐसा हो जाता है कि कुछ रहा ही नहीं। क्या कारण से मुक्त होना निर्विकार है?
निर्विकार भी रहे होंगे। तभी तो विकार हटाने का प्रयास हो रहा है।
सब कुछ नहीं भूलता। उसका ज्ञान तुम्हें नहीं है। अगर भूल ही जाता तो बुद्ध ज्ञान के बाद अपने पिता से मिलने नहीं जाते, अपनी पत्नी से मिलने नहीं जाते। याद रहता है। उसमें राग, द्वेष और उम्मीद नहीं रहती। अधूरापन रहता है, क्योंकि मेमोरी में है, उस जगह को क्लिक किया गया है। जैसे रोबोट में मेमोरी फीड होती है, उसकी रेंज वहीं तक होती है, वहीं तक जा पाता है। कारण अवस्था तक हम भी वहीं तक जा पाते हैं। जितनी जानकारी है, उतना ही लेनदेन कर पाते हैं। जितना रास्ते का पता है, वहीं जाकर खड़े हो जाते हैं कि अब कहां जाऊं। मेमोरी अनंत नहीं। जितनी जानकारी है उतना ही जा पाता हूं। अपने आप को रोबोट से अलग क्या समझ रहे हो? वही हाल है। इस रोबोटपन से हसो। आप जिंदा मशीन हो। जब तक कामनाओं में जा रहे हो, तब तक जिंदा मशीन हो।
देखो मेरी जरूरत क्या है और शरीर की जरूरत क्या है। तब मशीनपन से हटोगे। तब शरीर की जरूरत के लिए अलग काम करोगे और अपनी जरूरत के लिए अलग। अभी एक ही जरूरत बना रखी है। आध्यात्म में नहीं हो तो बस शरीर की जरूरत है, और तुम मशीन हो, भाग रहे हो। यह जरूरत किसकी है?
जागृत कहने के लिए भी शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है। प्रकृति क्या है? जो कुछ देख रहे हो, उसमें तुम भी दिख रहे हो। तुम भी प्रकृति के हिस्से हो। उसी का हिस्सा हूं, यह मैं बता रहा हूं। जो दिख रहा है और जो देख रहा है, हिस्सा को मत देखो, अपने को देखो। हिस्सा को क्यों देख रहे हो, जब तुम ही उसी प्रकृति के हिस्से हो। इस हिस्से को समझ गए तो इसे समझ लिया।
इसे तब समझ पाओगे जब लगोगे। सामने सामने समझोगे तो इसे कैसे समझोगे। जब कारण से मुक्त हो जाते हो, तब वह अवस्था आती है। जब तक कारण में हो, तब तक उस जगत में हो। कारण से भी मुक्त हो गए, तब बात और है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: Sunday Q&A May 3, 2026 #Yogi · 2026-05-03