प्रश्नोत्तर P6-0037 · भाग 6
सत्संग में व्यवधान हो तो रोक सकते हैं? गुरु मौजूद हो तो?
आप एकदम सही किए, लेकिन थोड़ा इंतजार करते। मैं कहता तो करते। तब अच्छा था। उससे आपका असर उठ जाता। नहीं तो अभी पंजाब जाएगा। हम एक-एक को खड़ा करते रहते हैं। पहले देखो कि क्या मेरा अधिकार है वहाँ। मेरा अधिकार है, तो फिर बोल दो। कोई बात नहीं, तब तो बोलो।
जैसे मान लो हम यहाँ नहीं रहते, और आप यहाँ सत्संग के लिए निमित्त बने हो, मैं यहाँ नहीं हूँ। तब आप किसी को बोल सकते हो। अगर असभ्यता का बर्ताव करता है, तो आप बोल सकते हो कि भाई, यहाँ सत्संग चलेगा। अगर अच्छे से बैठना है, बैठो, नहीं तो जाओ। तब आप बोल सकते हो। और अगर मैं आ गया, तो बात ही खत्म। फिर तो बोलना ही नहीं चाहिए।
जैसे कल कहा, डॉक्टर साहब अब आप ही पूछोगे, कहा बंद करो। लेकिन हमने कहा, तुम चुप रहो, डॉक्टर साहब आप बोलते रहो। क्योंकि मैं हूँ, और मैंने उन्हें पूरा मौका दिया। तो आप देखो कि क्या मेरी जरूरत है। पहले ये देखो। जरूरत हो तो बोलो, नहीं तो चुप हो जाओ।
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वीडियो: दिल्ली में पहला सत्संग पार्ट 3 #योगी · 2026-02-02