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प्रश्नोत्तर P6-0006 · भाग 6

बहुत पाप कर दिया हो तो आत्मिक कल्याण कैसे?

जितना पाप किया है, उतना जाके पुण्य करे। जैसे अंगुलिमाल के साथ हुआ। राजा से उन्होंने बचा लिया। जैसे लोग बोलते हैं, कृष्ण ने कहा है, मेरी शरण में आ, मैं तेरे सारे अपराध क्षमा कर दूंगा। लोग इसका मजाक उड़ाते हैं, कि अपराध करो और कृष्ण की शरण में चले जाओ। लेकिन बुद्ध ने क्या किया? अंगुलिमाल जब गया, तो राजा खोजते-खोजते आया। क्योंकि वो सजा का अधिकारी था। उसने कई लोगों की हत्या की थी। बुद्ध ने कहा, अंगुलिमाल जा चुका है। अंगुलिमाल यहां नहीं है। बचा लिया। लेकिन वो शरण में गया। फिर क्या हुआ? अंगुलिमाल जब उस एरिया में घूमा, तो लोगों ने पत्थर मारना चालू किया। लहूलुहान हो गया। लेकिन उसने जवाब नहीं दिया। तो उन्होंने अपना बदला ले लिया। उसे सजा मिल गई। जब आप किसी महापुरुष की शरण में जाते हो, तो सजा दूसरे तरीके से दिला देता है। ऐसा नहीं कि आप अपराध करो, शरण में जाओ, और फिर पता चले कि फिर अपराध किया। हम अपनी समझ से समझते हैं। कृष्ण भगवान ने कहा, मेरी शरण में आओ। मेरी शरण में आने का मतलब, तुम्हें पश्चाताप हो रहा है। पश्चाताप भी एक सजा है। पश्चाताप भी एक सजा है। अगर तुम्हें पश्चाताप होने लगा, सत्कर्म करने लगे, ईमानदारी से जीने लगे, तो जिस जेल में हो, वो जेलर भी तुम्हारी सजा कम करवाने का इच्छुक हो जाएगा। और करवा देता है। बहुत कैदियों की सजा समय से पहले छूट जाती है। उनके हावभाव, उनके विचार को देखते हुए छोड़ दिया जाता है। तो ऐसे ही आप ईमानदारी और सत्कर्म अपना लो, और आगे बढ़ो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23