प्रश्नोत्तर P5-0039 · भाग 5
आत्मज्ञान के बाद जनक की तरह रह सकते हैं? गिरेंगे कैसे? कुछ नहीं चाहिए भाव कैसे?
रह सकता है। क्या दिक्कत है। रह सकता है। जनक इसलिए रहे कि गुरु ने आदेश दिया। उनकी जाने की इच्छा नहीं थी। राजा जनक जाना कहाँ चाहते थे। गुरु ने कहा कि नहीं, तुम एक अच्छे राजा की तरह जीवन जी सकते हो, और तुम्हारी समाज को जरूरत है। अष्टावक्र ने उन्हें सलाह दी, तब वो वापस गए। तो वो रह सकता है।
गिरेगा कैसे। अब वो गिरता कैसे है। व्यक्ति बेईमानी और दुष्कर्म से गिरता है। अब वो करने लायक रहा ही नहीं। कर ही नहीं सकता। अब जो भी होगा, सत्कर्म ही होगा, बस ईमान। यहाँ तक मैं आपको बता दूँ, आत्मज्ञानी ईमानदारी और सत्कर्म से भी ऊपर उठ गया। उसके जीवन में ईमानदारी और सत्कर्म भी नहीं रहा। कर्म ही नहीं रहा। तो गिरेगा क्या। कैसे गिरेगा। जब खुद का कोई काम होता है, तब आदमी गिर सकता है। अब उसके पास कोई काम ही नहीं है। गिरेगा कैसे। जैसा है, वैसा लोगों को बता दे रहा है। बस, बात खत्म। देखने वाले लोग समझेंगे, वो गिर रहा है, उठ रहा है। उसको कुछ नहीं होता। अब नहीं गिर सकता।
हाँ, एकदम। ईमानदारी और सत्कर्म मूल है, ये ज्ञान के बाद देखा, जाँचा। और कुछ नहीं चाहिए भाव बनाओ। जरूरत में जीना चालू करो। सूत्र तो आपको मिल ही गया, सरल तरीके से।
अपने लिए नहीं निकला था। मेरे जीवन में मिलने वाले भी बहुत सज्जन और अच्छे लोग थे। जब मैं ज्योतिष का काम करता था, मैं थक गया था। बोला, यार, इसमें नाम सूरत का कुछ नहीं है। मेरे एक गुरु जी थे, वो ज्योतिष सिखाए थे। मैं उनके पास गया। मैं बोला, मुझे कहीं एकांत में जाना है। अब मेरी इच्छा नहीं है यहाँ रहने की। बोले, क्या करोगे जाके। तुम्हारे पास कुछ है, समाज के लिए कर सकते हो। बोला, नहीं, मुझे जाना है। तो उनका कहना था कि पशु भी अपना भला कर लेता है। तुम्हारे पास कुछ है, और तुम समाज के लिए कर सकते हो। तो मुझे सलाह देने वाले उचित लोग मिले मेरी जिंदगी में। फिर मैं संन्यासी हुआ। संन्यासी, संन्यास के लिए नहीं हुआ, सीखने के लिए। तीन दिन बाद आश्रम छोड़ा। फिर 2015 में कपड़े उतारे। ऐसे घूमता रहा। फिर भी खोज एक थी। फिर आध्यात्म को देखा, व्यापार बन गया। तो मैंने कहा, प्रत्यक्ष ज्ञान ढूँढूँगा। कौन सा ज्ञान। प्रत्यक्ष। इसमें कोई नहीं होगा, सिर्फ वो होगा। इसमें कोई आदमी और नहीं होगा। मैं तो एकदम नहीं रहूँगा, और किसी को घुसने नहीं दूँगा। मैं नहीं रहूँगा, और कोई और भी नहीं घुसेगा। और तब घुसता, जब प्रत्यक्ष नहीं होता। तब आप यहाँ से जाके किसी और से पूछते। मैं यहीं का यहीं खत्म करूँगा। तीसरे को घुसने नहीं दूँगा।
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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18