प्रश्नोत्तर P5-0038 · भाग 5
आत्मज्ञान भी प्रारब्ध के अनुसार होता है क्या? इसी जन्म में संभव है?
मुझे ज्ञान के बाद समझ में आया। मूल्य ज्ञान के बाद पता चला, 2020 में ही आया है। पहले ज्ञान हो गया, बाद में समझ में आया कि इतना सब करने की जरूरत नहीं थी। और बाद में आया कि यही तो करता था, इसका कारण हो गया। मैं यही तो करता था। मैं बोल सकता हूँ, बचपन से। लेकिन पता नहीं था। तो बचपन से इतना समय लग गया। ये मैं बचपन से करता था, क्योंकि मुझे अपना जीवन याद आने लगा कि मैंने क्या किया। कोई अगर शुरू करेगा ये करना, तो वो बस करता रहे। कब होगा, उसके हाथ में है या नहीं, ये नहीं पता। लेकिन होगा पक्का। उसी जन्म में होगा, ये पक्का नहीं है। लेकिन बहुत तेजी से करेगा तो इसी जन्म में संभव है। मैं अगला जन्म तो बोलता भी नहीं। इसी जन्म में करो। मैं तो बोल रहा हूँ, इसी जन्म में करो, अभी करो।
प्रारब्ध क्या है। आपका कर्म ही तो है। प्रारब्ध के पीछे क्या है। आपका काम। आपको महीने का पेमेंट मिला, तो उसके पीछे आप कहेंगे ये प्रारब्ध से मिला। तो एक महीने की मेहनत आपकी थी। जितनी आपने हाजिरी भरी, उतना अगले महीने मिल जाएगा। पूरी हाजिरी भरो। सीधी सी बात है। प्रारब्ध किसके हाथ में है। आपके हाथ में है। पिछले जो बोलते हैं, पिछले दिन का पता नहीं है। जितना पता है उतना करो। जो पता नहीं, उसके पीछे क्यों घूमना।
नींद आ रही है, तो सोए क्यों नहीं। गद्दी है, यहाँ सोना है। कल रात में आए, दिन में इतना मौका मिला, सोए क्यों। बाँसुरी बजा रहे थे। कोई काम भी तो नहीं था। आराम से जाके बिछा के बढ़िया सोए होते, पंखे के नीचे। तब तो इधर-उधर राउंड मार रहे थे। अपने समय की नींद आ रही है, अब यहाँ तोड़ना पड़ेगा, क्योंकि रोज यहाँ यही हालत है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18