प्रश्नोत्तर P5-0012 · भाग 5
(वही साधिका) क्या हम (आपकी साधना की) कॉपी कर सकते हैं?
कॉपी कभी नहीं कर सकते — नकली, नकली रहता है ना। देखिए, कहा गया है कि नकल के साथ अकल होना जरूरी है। मैंने किस स्थिति में किया है, किस लिए किया है (वो देखो)। पहली रात (बैठे), तो दूसरी (रात) क्यों नहीं किए? क्योंकि पहली रात में तो ऐसे ही किए; दूसरी रात में तुम होते। अगर कुछ आपने किया, और एक बार के (बाद) दूसरी बार नहीं किया, इसका मतलब नकल किया, लेकिन बर्दाश्त नहीं कर पाए। अगर थोड़ी भी अकल लगी होती, तो दूसरी रात करते, और फिर तुम होते। पहली रात तो ऐसे ही हो गया — भूल से, भ्रम से, तुक्का लगा। आप कॉपी मत करो — हो भी नहीं (सकती)। सबकी यात्रा अलग-अलग है। कॉपी क्यों कर रहे हो? क्यों कॉपी करना चाहते हो? हम कुछ आपको बता रहे हैं — वो करो ना; आपके लिए, आपकी क्षमता अनुसार बता रहे हैं — आप वो करो ना। अगर वो (कॉपी) करने से कुछ होता, तो मैं इतने घंटे सत्संग क्यों करता? (एक साधक ने बताया कि भाई की देखा-देखी उसने भी चार रोटी ले लीं, पर खा नहीं पाया —) आपने नकल की, लेकिन अकल नहीं लगाई — उसकी क्षमता अलग है, मेरी क्षमता अलग है। अच्छा हुआ, उसने आज चार ही मांगी, आठ नहीं मांगीं! सबकी क्षमता अलग-अलग।
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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17