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प्रश्नोत्तर P5-0008 · भाग 5

(वही साधिका) जो हमारे साथ चल रहा है, उसके ज्ञान पर भरोसा हो कि वो पक्का है — पर हम तो अभी कच्चे हैं। आपने कहा कच्चा टिक नहीं पाएगा — तो पक्का होने के लिए क्या करें? टिकने का मतलब यहां टिकना या अपनी लाइफ में? और क्या कोई ऐसा भी सवाल है जिसका जवाब ना हो — जैसे लोग कहते हैं पहले मुर्गी आई या अंडा?

उसके बताए हुए मार्ग पे चलो। (टिकना —) आपकी जिज्ञासा पक्की है कि नहीं, पहले ये (देखो)। अगर जिज्ञासा पक्की है, तो आप पक्के हो, फिर यात्रा भी होगी। और जिज्ञासा ही नहीं, बस ऐसे ही चले आए — चलो देखते हैं, बोल तो रहे हैं; ऐसा प्रश्न पूछूंगा, जवाब ही नहीं दे पाएंगे — तो जब ऐसा प्रश्न पूछोगे, तो जवाब की जरूरत ही नहीं है; तुम पक्का करके आए हो कि जवाब ही नहीं मिलेगा — तो जाओ घर। मैं तो उनके लिए बैठा हूं, जिन्हें जवाब चाहिए। (टिकने का मतलब —) अपनी जिज्ञासा पे टिके रहना। (मुर्गी-अंडा —) हमने कहा — भैया, मुर्गे को तो खोजो, ये मुर्गा बताएगा ना! तुम लोग मुर्गे का नाम ही नहीं लेते, और मेन है मुर्गा। तुम लोग मुर्गी और अंडे की बात करते हो, तो मुर्गे से पूछ लो ना कौन आया? अरे, शरीर तो मुर्गे से निकला ना — उस मुर्गे से पूछ कि तेरे अंदर से पहले मुर्गी आई, या पहले अंडा आया; क्या आया, भाई बता तू। तुम मुर्गे की खोज करो। तुम बोलोगे मुर्गा कहां से आया — पहले मुर्गा तो खोजो; तुम्हारे पास मुर्गी, अंडा तो है, मुर्गा तो खोज लो। उस कहानी में तो मुर्गी और अंडा है — पहले मुर्गे को तो लाओ; तो मुर्गी और अंडे को छोड़ो, पहले मुर्गे को खोजो। अरे, शरीर तो मुर्गे से ही आया ना — हमारा शरीर पिता से ही आया ना, चाहे स्त्री का हो, चाहे पुरुष का हो; चाहे अंडा हो, चाहे मुर्गी हो, मुर्गे से निकला — तो मुर्गे को पकड़ो, और हाथ जोड़ो कि तेरे अंदर से दोनों निकलते हैं, (बता) तेरे अंदर से पहले कौन निकला? मुर्गी निकली, (तो) बाद में अंडा कैसे निकला? या तो तेरे अंदर से दोनों निकलते हैं — तू मुर्गी को भी पैदा करता है, अंडे को भी पैदा करता है — यार बता दे! वो मुर्गा बता देगा। आप लोग मुर्गे की खोज करो — अरे, ये मुर्गा बताएगा ना; आप लोग मुर्गे को लाते ही नहीं। मुर्गा कहीं सोच रहा होगा — यार, मुझे इस कहानी से निकाल दिया! उसे कितना दुख होता होगा कि यार इन लोगों ने मेन मैन, मुझे ही निकाल दिया — हीरो ही चला गया फिल्म में से! सोचो जरा, वो बहुत दुखी होता होगा; और फिर वो हंसता भी होगा कि यार, दुनिया में कोई पैदा हुआ, (जो) मुझे भी लाया — उस कहानी में मुझे लोग निकाल दिए थे, कितना अच्छा व्यक्ति है कि मुझे लाया; मेरा तो नाम ही ये लोग नहीं लेते थे। वो तो अंतरात्मा से आशीर्वाद दे रहा होगा — वो जहां भी होगा, वो मुर्गा मुझे बहुत (आशीर्वाद) देता होगा। बोलते हैं पहले मुर्गी आई, पहले अंडा आया — मुर्गे का तो नाम-निशान भी नहीं है। तो मैं आपको बता रहा हूं कि यार, तुम दोनों को छोड़ो, पहले मुर्गे को खोजो। तो मैं वही कहता हूं कि आप यहां आइए — या तो आप नंगे हो जाओ, या तो मुझे कर दो; तभी बात बनेगी। मैं तो जिज्ञासु की बात कर रहा हूं।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17