प्रश्नोत्तर P4-0189 · भाग 4
(वही साधिका) मैं बहुत सी चीजों से मुक्त हो गई — ईर्ष्या, समाज, रीति-रिवाज, अंधी पूजा-पाठ, मां-बाप का मोह। लेकिन आर्थिक डर पर आकर अटक जाती हूं — अगर मेरे पास पैसे नहीं हुए तो जिंदगी कैसी होगी? ईमानदारी से (ज्ञान के) वीडियो बनाती हूं तो लोग सुनते नहीं, कमाई घट गई है। इस डर को कैसे खत्म करूं?
इसे मजबूत करो। ईमानदारी से आप धन कमाओ। लेकिन वो (धन) आएगा, तभी आपका वो डर हटेगा, नहीं तो नहीं हटेगा। (ईमानदारी से धन उस तरह नहीं आता —) और कोई रास्ता देखो; अर्थ कमाने के अनेक रास्ते हैं। (मेरा उद्देश्य) पैसा कमाना है, तो मुझे पैसा कहां से मिलेगा — मुझे वह काम करना है ईमानदारी से। लोगों को क्या चाहिए — झूठ चाहिए, सच चाहिए — वो छोड़ो। आपको क्या चाहिए? पैसा। तो (ऐसा न हो कि) जहां से आपके पास पैसा (आए), लेकिन आप गिर जाओ — ये ध्यान रखना। लोगों को झूठ चाहिए, सच चाहिए — मुझे वो लोगों की फिक्र नहीं है; पहले मुझे देखना है कि मुझे चाहिए पैसा, तो मुझे पैसा कहां से आएगा, उसके लिए मुझे काम करना है, पहले मैं उसके लिए काम करूं। (साधिका ने कहा, पैसे से मुक्त होना है, अपने को इतना संपन्न बना लूं कि डर ही खत्म हो जाए —) हां, ये डर (हटेगा) तब आपकी आगे की यात्रा होगी। आपके पास सेविंग होनी चाहिए। डर निकालने के लिए आपका एक टारगेट पूरा होना चाहिए कि मेरे पास इतना हो जाएगा, और मेरा डर खत्म। तो वो डर तभी निकलेगा, जब उतना हो जाएगा — तो समझ कर उतना ले लो, (उतना) करो।
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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17