प्रश्नोत्तर P4-0174 · भाग 4
(कुटिया में गोयल जी, जिन्होंने रात 2 बजे प्रार्थना की थी कि मुझे सेवक रूप में स्वीकार करो, और जिन्हें उनके पहले गुरु ने यहां भेजा था) — इतने भाव के बाद भी मेरी स्थिति गड़बड़ क्यों हो गई? मेरी जीवात्मा कहां अटकी है, कैसे निकले?
(सामने वाला) थक जाता है, इसमें कोई दो राय नहीं। जब गोयल जी ने कह दिया कि भाई, मुझे सेवक के रूप में स्वीकार करो, उसके बाद तो (ये) रहना नहीं चाहिए था। और जब सामने वाले ने स्वीकार ही कर लिया, फिर बात ही खत्म हो गई। अब देख लो, उस समय हमारी आंख में आंसू आ गए थे — आपको पता था कि नहीं? (आवाज से) पता तो चल ही रहा होगा।
आप देखिए कि इनके गुरु ने इन्हें भेजा। तो फिर परीक्षा की बात ही खत्म हो गई, कि जिसकी शरण में मैं था, वही (मुझे) भेज रहा है। और उसका कितना भाव था कि आपका कल्याण हो — भेजने वाले का भाव कितना पवित्र था, कि मेरी क्षमता नहीं है, लेकिन अब मैं तुझे भेज दे रहा हूं, जा, तू तो कर अपना कल्याण। लेकिन (आप जैसे कह रहे हो कि) मैंने कसम खाई है कि अपना कल्याण तो होने नहीं दूंगा, कुछ भी हो जाए। बड़ा दुर्भाग्य है हमारा — कहां से कहां! जिसकी शरण में मैं था, जब उसने ही कह दिया 'जा', तो बात तो खत्म हो गई; लेकिन हमने कसम खाई है कि हम अपना कल्याण नहीं होने देंगे। मेरे भी कुछ कर्म हैं — कर्म हैं तभी तो मैं पहुंचा, कर्म हैं तभी इतना ईमानदार गुरु मिला कि मुझे आगे भेज दिया; कुछ तो उसने देखा, नहीं तो वो अटकाए रखता अपने पास; और उसने जहां भेजा, कुछ तो देख के भेजा होगा। लेकिन मैं कह रहा हूं — तुम भी चाहो। यहां दो लोग तुम्हारा कल्याण चाह रहे हैं — जिसने आपको भेजा, और जिसके पास भेजा; दो लोग तुम्हारे पीछे पड़े हैं। लेकिन तुम क्या कह रहे हो? मैंने खुद कसम खाई है — कल्याण तो नहीं होने दूंगा; आया जरूर कल्याण के लिए हूं, लेकिन कल्याण नहीं होने दूंगा।
(हमारी जीवात्मा कहां अटकी रहती है, कैसे निकले —) यही समझ के निकलोगे। मैं कह रहा हूं कि पूरी तरह बात करो ना, आधी-अधूरी क्यों करना? जब हम कह रहे हैं कि आपने मुझे सेवक रूप में स्वीकार किया, तो बात ही खत्म हो गई। जैसे मैंने अपने आपको सेवक रूप में रखा था, तो कोई मुझे पाखंडी बोला, तो भी मैं मुस्कुराता रहा; कोई कुछ भी बोला — एक साल तक का टाइम दे दिया था। अब आके बोले, तब तो तुरंत भगा देंगे — चल हट; जब (कोई) पाखंडी (कहता) आया, कि चल यहां से हट, अब थोड़ी मौका देंगे। जिज्ञासुओं के लिए काम करेंगे ना, (या) निकलने वालों के लिए काम करेंगे? एक साल तक सबको समय दिया — किसी ने गाली दी, उसको भी समय दिया, चाहे जैसे भी आए, समय देता गया। लेकिन अब मैं उससे मुक्त हो गया। मैंने ही उसमें (अपने आप को) रखा था, और मैंने ही अपने आप को मुक्त कराया। अब जो जिज्ञासु नहीं है, तो चलो हटो, चलो जाओ। तो आप देखिए, मैं आपको भी दिखा रहा हूं — आप भी देखिए कि गुरु (आपको) भेज रहा है, और जो आप कहते हैं, 99 वाले दरवाजे तक तो पहुंच जाते हो — (उसने) फाइनल जगह भेज दिया।
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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30