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प्रश्नोत्तर P4-0171 · भाग 4

(कुटिया में) बाबूलाल भाई ने फॉर्म में 'आत्म कल्याण होने तक यहां रुकूंगा' लिखवा दिया; फिर कहा कि मेरा भाव यह नहीं था, पर काटिए मत — गुरु जी मेरा भाव समझ जाएंगे। इसमें क्या गहराई है? और आपने उनकी पूरी जिम्मेदारी पहले ही क्यों घोषित कर दी, इस शर्त के साथ कि अगर वो (घर) नहीं गए तो?

एक पॉइंट पकड़िए आप लोग — उसने कहा कि अब काट के मत लिखिए, गुरु जी समझ जाएंगे। मैं यही कहना चाहता हूं, आप इस पॉइंट को पकड़िए — उन्होंने कहा कि मैं काट के लिख देता हूं, तो (बाबूलाल ने) ये शब्द कहा ना कि वो समझ जाएंगे, आप काटिए मत। (और) फॉर्मेट तो बहुत बाद में भरा था, उससे पहले (मैंने) बोल दिया था। एक संभावना इसकी दिखती है, तो मैंने बोल दिया कि (अगर ये) गया नहीं तो (पूरी जिम्मेदारी मेरी)। क्योंकि अगर मैं ये नहीं बोलूंगा, तो ये सोचेगा कि (जिम्मेदारी) ले ही ली, तो मैं जाके आता हूं, थोड़ा इधर-उधर घूम आता हूं। लेकिन (जिम्मेदारी) तब ली है, जब तू पूरी तरह इसी स्थिति में रहेगा। विपरीत परिस्थितियां यहां भी बनीं — बाबूलाल के (फॉर्म में) भी, कि इन्होंने लिख दिया; तो इन्होंने कहा, नहीं, मुझे ये तो नहीं लिखवाना था; तो (लिखने वाले ने) कहा मैं काट के लिखता हूं; तो बोले — नहीं, काटो मत, गुरु जी समझ लेंगे। आप लोग नहीं समझ पाओगे, क्योंकि आप पढ़ रहे हो, लेकिन वो तो समझ लेंगे; मैं तो उनके लिए लिखवा रहा हूं, वो थोड़ी ना कागज की लिखाई पे ध्यान देंगे। मैं वही कह रहा हूं कि आप इसे गहराई से (समझिए) — इस पे मैंने पहले भी बात किया, अब भी बात कर रहा हूं, इसमें बहुत गहराई है — कि लिख तो रहा था, वो लिखा गया, लेकिन सामने वाला काटने के लिए भी तैयार है, पेपर भी दूसरा मिल जाता; लेकिन उसने कहा — अब तो लिखा गया है, लेकिन इस लिखाई का कोई मतलब नहीं है; जहां पहुंचना है, पहुंच गया, वो समझ लेंगे; जिसके लिए मैं लिखवा रहा हूं, वो क्या लिखा ये नहीं देखेगा, मेरे भाव क्या हैं वो देख लेगा। इतना तो उसका स्तर है ही। और उसके पहले ही मैंने फाइनल कर दिया था। तो इस भाव में अगर कोई गुरु के पास है, तो कल्याण पक्का है, दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। ये भाव बनाए रखें, क्योंकि इस भाव को गिराने वाले भी लोग बहुत आएंगे। (भाव पक्का है या नहीं,) ये तो परिस्थितियां पैदा करेंगी, पता करेंगी। जैसे इसके भाव को (भी) एक गिराने वाला था — उसने भी इसके भाव को तोड़ना चाहा (कहा कि गुरु जी को आत्मज्ञान नहीं है), लेकिन नहीं टूटा। (बाबूलाल ने उसे यह समझाने की कोशिश नहीं की कि आत्मज्ञान है कि नहीं, बल्कि कहा कि गुरु जी तुम्हें तुम्हारे बाप से भी ज्यादा चाहते हैं, जाओगे तो पछताओगे —) तो जिसने इसको भटकाया, उसी को (इसने) समझा दिया। ये काम ये (दूसरे) भी कर सकते थे। और अगर आज समाज के दृष्टिकोण से आप लोगों से पूछा जाए, तो कहोगे कि आपकी समझ ज्यादा है, इसकी कम है — नहीं। (बाहरी दृष्टिकोण से देखोगे तो कहोगे इनकी समझ ज्यादा, इसकी कम — लेकिन इसकी समझ इसके काम की है।)

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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30