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प्रश्नोत्तर P4-0149 · भाग 4

(लाइव) गुरु जी नमन। आत्मा शरीर में रहती है या शरीर आत्मा के अंदर?

इस पिंड के अंदर हम हैं; पिंड मेरे अंदर नहीं। लेकिन हम उसमें समा गए हैं, वह मुझ में समा गया है। जैसे दूध में पानी डाल दिया, तो क्या दूध के अंदर पानी है कि पानी के अंदर दूध? मिलने के बाद दोनों एक-दूसरे में समा गए, अब अलग नहीं हैं। तो हम इसमें समाने के बाद — कितने लोग तो अपने आप को शरीर ही मानते हैं, जैसे पानी (दूध में) गया तो पानी भी तो दूध ही बोला जा रहा है। तो कितने लोग अपने को शरीर मान के ही जीते हैं। बहुत कम लोग परमहंस होते हैं, जो अपने आप को शरीर से अलग कर पाते हैं; उन्हीं को परमहंस की उपाधि दी गई है। जैसे हंस को बोला जाता है कि हंस दूध-पानी को अलग कर देता है, इसलिए उसे हंस कहा गया है; वैसे ही परमहंस की उपाधि आत्मज्ञानी को दी गई है, कि वो अपने आप को शरीर से अलग (कर लेता है)।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25