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प्रश्नोत्तर P4-0138 · भाग 4

(लाइव) गुरु जी नमन। कैसे पता करें कि कौन सा कर्म ठीक है और कौन सा गलत? किसी को कुछ सही लगता है तो किसी को कुछ और।

नहीं, देखना ये है कि मुझे अगर कोई कार्य मिला है, क्या मैं ईमानदारी से कर रहा हूं — बस ये देखना है। किसी को सही लगता है, गलत लगता है — मुझे उससे मतलब नहीं है। मुझे अपना काम ईमानदारी से करना है। जैसे मान लीजिए, आप (कुटिया में) घूम रहे थे, कैमरे पे आपको देख के कल मैंने वहीं से डांटा ना — तो मुझे थोड़ी मतलब कि आपको बुरा लगा; मैं अपना काम ईमानदारी से कर रहा हूं। (बाबा ने कहा कि मैं झाड़ू लगाने ही वाला था —) तो कितनी देर आप खड़े थे? क्या जरूरत थी? मैं बहुत देर से देख रहा हूं — वो बालक झाड़ू मार रहा है, तुम देख ही रहे हो। इसलिए अब देखो, मेरी ईमानदारी — मैं वहां से (रास्ते से) फोन किया कि वो बाबा वहां क्या कर रहा है, बोला स्पीकर ऑन कर, तो मैंने इनको बोला — क्या कर रहा है? उधर जा, या तो कुछ काम कर, या तो फिर जा आत्मिक चिंतन कर, ऐसे क्यों खड़ा है? तो मेरा कहना है कि मैंने अपना काम ही ईमानदारी से किया। अब आपको अच्छा लगे, बुरा लगे, उससे मुझे मतलब थोड़ी ना है; मैं अच्छे या बुरे के लिए काम नहीं कर रहा हूं। तो आप यहां रहो तो सजो (सुधरो), नहीं तो यहां का सिद्धांत है — नहीं तो भागो। आप ये मत समझना कि मैं अंदर हूं तो आपको नहीं देख रहा हूं। मैं अभी दिल्ली जाने वाला हूं, अब तो विदेश, वहां से भी कैमरे में देखूंगा। यहां हर जगह कैमरा लगा है — आप इस आश्रम में जहां भी बैठोगे, कैमरे की नजर में हो, और साउंड के साथ भी — आप क्या बात करते हो, मैं वहां से सुनता हूं। तो मैं वहां से देखता रहता हूं, क्योंकि मुझे जीवन का महत्व समझ में आया है; अभी आपको समझ में नहीं आया। एक सेकंड की कीमत आप नहीं जानते हो, मैं समझ चुका हूं, इसलिए मैं आपका एक सेकंड बर्बाद नहीं होने देना चाहता था। अब बाबा वहां से हट के चले गए — क्या मुझे कुछ मिला? और वही शाम तक खड़े रहते तो मेरा क्या जाता? लेकिन इनका समय बर्बाद हो जाता। और ये मेरे सानिध्य में आए हैं, तो जिम्मेदारी मेरी है। लापरवाह है, तभी तो मेरे सानिध्य में आया सुधरने — तो (सुधारना) मेरा काम है। जब तक मेरी शरण में है, तब तक मेरी जिम्मेदारी बनती है इसकी देखरेख करना। ये अपनों की कुटिया से चला जाए, मुझे मतलब नहीं; लेकिन अपनों की कुटिया में रहेगा, तो कहां खाता है, कैसे उठता है, कैसे बैठता है, किससे बात कर रहा है, क्या कर रहा है, जिसके लिए आया वो काम कर रहा है कि नहीं — ये जांचने की जिम्मेदारी मेरी है, उसकी नहीं। तो मैं उसका एक पल भी बर्बाद नहीं होने दूंगा। तुम तो आ गए हो, तुम्हारी जिम्मेदारी खत्म। यहां जब तक आप रहोगे, जिम्मेदारी मेरी है; यहां जब तक रहोगे, हर क्षण आपका स्तर उठेगा। यहां मैं आपका एक भी क्षण (बर्बाद नहीं होने दूंगा), इसलिए कि मुझे जवाब देना है ना — मैं कोई काम कर रहा हूं तो मुझे जवाब देना है कि मेरा काम ईमानदारी से हो रहा है कि नहीं। (ऐसा नहीं कि) बस ऐसे ही बन गया, और मैं चला गया, या मैं अंदर बैठा हूं और आप बढ़िया से घूम रहे हो — ना ना, इसको मुझे होटल नहीं बनाना, ये साधना-स्थान है। ये जगह पे मैंने अपनी कुटिया का निर्माण किया है, यहां से आखिरी यात्रा होगी, ये आखिरी यात्रा के लिए बनाया है; यहां एक क्षण भी किसी का समय बर्बाद होने नहीं दूंगा। हम तो (नियम तोड़ने वाले को) रात को ही, तुरंत भगा देते हैं। इसलिए कि सारा काम मैं खुद अपना करता हूं, मैं किसी पर निर्भर नहीं हूं। निर्भर आदमी चाहेगा ना कि यार मेरी सेवा करने के लिए कोई रुके। (महाराज जी,) आप मेरे साथ इतने दिन थे, कभी मैंने आपसे कोई सेवा ली क्या? मैं अपना काम खुद करना चाहता हूं, खुद करता हूं; मैं तो आपका भी कर दूं। मैं किसी पर निर्भर थोड़ी ना हूं कि मुझे सेवक चाहिए — मुझे तो जिज्ञासु चाहिए। क्योंकि मैं तो सेवा करते-करते खुद निकलना चाहता हूं, मेरा सेवा करवाने का कोई भाव ही नहीं है, और मैं अपाहिज भी नहीं हूं। तो मैं किसी का एक क्षण भी बर्बाद होते (नहीं देख सकता), इसलिए मेरी नजर हर समय यहां के जिज्ञासुओं पे ही रहती है — यहां तक कि मैं कैमरे का पूरा प्लेबैक देखता हूं। हम आपसे बात करें या ना करें, लेकिन नजर आप पे है। आप वहां राउंड मार रहे थे तो बाबूलाल को मैंने ही भेजा था कि देखो, क्यों राउंड मार रहे हो — आसन ले, बैठ। मैं जिम्मेदार व्यक्ति हूं जीवन में; आप मेरे पास आए हैं तो ऐसे थोड़ी ना आपको राउंड मारने दूंगा। आपका मुझे उपयोग थोड़ी करना है, आपको चेला बना के थोड़ी ना यहां झाड़ू मरवाना है — यहां तो कुछ ऐसा है नहीं भाई, अपना काम करो। यहां मैंने सिस्टम ही ऐसा रखा है कि आपको व्यक्तिगत सेवा में उलझाया ही नहीं जाएगा। यहां कोई रसोई का मालिक भी नहीं है; आप साथ में मिलजुलकर बना के खा सकते हो। यहां ऐसा नहीं है कि कोई पुराना है तो मालिक है — वो जरा सा एक आदमी से ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता, चाहे कोई भी हो, चाहे मैं ही क्यों ना रहूं; मैं जब भी बात करूंगा तो आपके हित के लिए बात करूंगा। यहां का मालिक सिर्फ सिस्टम है, बाबा, यहां कोई मालिक नहीं, चाहे कोई पुराना हो, चाहे नया। (बाबा ने पूछा कि क्या अच्छी रोटी बनाने वाला अपने लिए अलग बना सकता है —) नहीं, सब मिलके बनाओ, अलग अपने लिए नहीं। आपका भाव है तो सबको बना के खिलाओ, आराम से। यहां कोई मालिक नहीं, यहां का सिस्टम-नियम मालिक है। अगर ये (सेवादार) आपको कुछ बोलते हैं, तो उसके पीछे आवाज इनकी है, लेकिन शब्द मेरे हैं। यहां तो किसी का कुछ है ही नहीं — मेरा भी नहीं; जिसमें आपका आत्मिक कल्याण है, उसका है। यहां पूरा सिस्टम काम करता है। यहां अगर आप नियम में रह रहे हो तो कोई नाम तक नहीं पूछेगा। फॉर्म भरना इसलिए अभी चालू किया, क्योंकि कुछ लोग घर से छुप के आए थे। तो फॉर्म इसलिए भरवा लेते हैं कि उसमें भी आपकी सुरक्षा है — कम से कम उनके घर पे फोन करके बातचीत कर ली जाए कि भाग के तो नहीं आए हैं। अभी उस दिन दो लड़के भाग के आए थे, तो दोनों को तुरंत भगाए। अब आप अगर भाग के आओगे तो आपके परिवार वाले कितने परेशान होंगे। और बाद में उसमें पढ़ा जाता है कि ये व्यक्ति किसलिए आया था, आध्यात्मिक है कि नहीं — लिखोगे तो पता चलेगा ना। हमारे पास और काम क्या है आप लोगों के अलावा? मेरा काम है — आप लोगों का कल्याण कैसे हो जाए, उसके लिए काम करना। समय रहता है तो उसको पढ़वाते हैं कि ये आते वक्त क्या लिखा, जाते वक्त क्या लिखा, और क्या सच में जितना लिख रहा है, उसमें जिया है? क्या उसके भाव हैं, या बस ऐसे ही कुछ भी लिख दिया? तो जितना भी किया जा रहा है, आप लोगों के लिए किया जा रहा है — आप लोग इसका लाभ लो।

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25