प्रश्नोत्तर P4-0107 · भाग 4
(लाइव) गुरुदेव, मां नर्मदे, आपको आत्म कल्याण के लिए अपना गुरु मान लिया है। एक बात पूछनी है — कई बार भाव तो सकारात्मक करने का आता है, और हो जाता है नकारात्मक। यहां किसका क्या दोष है?
कोई बात नहीं। आप बस सकारात्मक करते रहो। आपका भाव नकारात्मक में ना हो। बस, हो जाता है — कोई बात नहीं। हम एक गिलास पानी देने जा रहे थे, और मेरा भाव था कि इसकी प्यास को तृप्त कर दूं, और गिलास गिर गया — तो उसमें मैं दोषी नहीं हूं। गिर गया, मैं दूसरा ला के दूं; और अगर दूसरा नहीं भी है, तो मैं दोषी नहीं हूं, क्योंकि मेरा भाव गिराने का थोड़ी ना था। हां, अगर मेरा भाव गिराने का था कि मैं पानी तो दे रहा हूं, रास्ते में गिरा दूंगा, लेकिन किसी ने ले लिया और दे दिया, तो फिर भी मुझे दंड मिलेगा, क्योंकि मैं उसे नहीं देना चाह रहा था ना।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25