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प्रश्नोत्तर P4-0104 · भाग 4

(लाइव) प्रणाम गुरु जी। हम लोग पिछले छह साल से बेजुबानों की सेवा का एक ग्रुप चला रहे हैं — स्ट्रीट डॉग, गौ सेवा, पक्षियों की अन्न सेवा की जाती है। तो क्या यह सेवा सत्कर्म के लिए काफी है?

हां, काफी है। लेकिन इसके अलावा और भी अगर कोई आ जाए तो हमारा कर्तव्य है कि हम उसकी भी सेवा करें। अब ये आवरण मत देखो कि नहीं, कुत्ता तो कुत्ता। आप सेवा करने निकले हो जरूरतमंद की, तो अगर कोई भी पशु ऐसा आ जाए — अब पता चला एक कुत्ता, एक गधा, दोनों सड़ रहे हैं, आपने कुत्ते को उठाया, गधे को छोड़ दिया — तो आप अपराधी बन गए। उठाते तो दोनों को उठाते ना, क्योंकि जरूरतमंद दोनों थे। तो आप आवरण मत देखना — शरीर भी एक आवरण है — आप जरूरत देखना: क्या जरूरत है? मैं इस जरूरत की पूर्ति कैसे कर सकता हूं?

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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25