प्रश्नोत्तर P4-0086 · भाग 4
(लाइव) गुरु जी प्रणाम। जब आप कुटिया में रहने वाले व्यक्ति के किसी कार्य की सराहना करते हो या उसकी कोई गलती बताते हो, तो क्या उस व्यक्ति के भीतर उस गुण के साथ अहम भाव खड़े होने की संभावना हो सकती है? इससे वह कैसे उभरे?
देखिए, संभावना तब होती जब सामने वाले को कुछ चाहिए होता — कि उसकी बड़ाई करके उसका उपयोग करता — तब जाके। और अगर गुरु कुछ बात कह रहा है, तो गुरु के सामने तो अहम काम ही नहीं कर सकता। जैसे शेर के सामने गीदड़ को रख दो, तो गीदड़ की क्या ताकत काम करेगी? नहीं करेगी ना। एकदम दुबक जाएगा, या तो बच के भाग जाएगा — दो में से एक; अगर भाग नहीं पाएगा तो दुबक के बैठ जाएगा। तो ऐसे गुरु के सामने अहम काम ही नहीं करता, एकदम नहीं करता।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25