प्रश्नोत्तर P4-0064 · भाग 4
(कुटिया में साधक) कोई तो भगवान रूप लेता है — जैसे दस अवतार बोलते हैं, वे सब यहां अवतरित हुए। तो अवतार क्या है?
रूप से परे होने के बाद, रूप से मुक्त होने के बाद (वह) भगवान हो जाता है। अरे, सब एक ही से हैं। देखो, किसी ने अपने अवतार को समझा, और किसी ने नहीं समझा — इतना ही फर्क है। अवतरित तुम भी हो। आप देखो ना कि अवतरित उन्हें कब बोला गया? जब वो अपने आप को समझ लिए; उसके पहले तो तुम्हारी तरह घूम रहे थे, और आप ही की तरह जी रहे थे। तो किसी ने अपने अवतार को समझा, किसी ने नहीं समझा, क्योंकि सब एक ही से हैं ना। तो सब तो एक जैसे हैं; ऐसा थोड़ी ना है कि उनका परमात्मा अलग है, मेरा अलग है। तो अवतरित सब हैं; किसी ने अपने अवतार को समझा, किसी ने नहीं समझा। तो यहां पर यही बताया जा रहा है कि अपने अवतार को समझ लो; और आप तभी समझ पाएंगे जब ईमानदारी-सत्कर्म के साथ जीवन जिएंगे।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01