प्रश्नोत्तर P3-0095 · भाग 3
सत्संग में सुना कि हमसे जो गलत कर्म हुए उनका फल अलग मिलेगा और अच्छे कर्मों का अलग — अच्छा कर्म बुरे को काटता नहीं। तो फिर सेवा से मिला आशीर्वाद श्राप को कैसे काटेगा? और यह पूरी तरह खत्म कब होगा? किसी ने बड़ा अभिशाप दिया हो जो हमें पता भी नहीं, तो क्या करें?
मैं ऐसे काटना बता रहा हूं। जब हम पाप और पुण्य में जीते हैं तो हमारे पाप का फल और पुण्य का फल बराबर मिलता है। लेकिन जब हम सत्कर्म करने लगते हैं — जैसे एक कैदी को सजा हो जाए; वह अपना खाए-पिए, किसी से झगड़ा न करे, न कोई सेवा करे, तो उसकी जितनी सजा है उसे भोगनी पड़ेगी। और अगर वह जेल में सेवा करने लगे, सत्कर्म करने लगे, सबका ख्याल रखना चालू करे, तो जेलर को इतनी परमिशन है कि वह आगे फाइल बनाकर भेजेगा, कुछ लोग चेक करेंगे और कुछ सजा माफ कर दी जाएगी। अब आप उनके लिए सेवा कर रहे हो जिन्हें आप जानते भी नहीं — यह सत्कर्म हो गया, न पाप रहा न पुण्य। तो आपका कुछ कम हो जाएगा।
पूरा तो हो ही नहीं सकता; भोगने में ही कुछ कम होगा। पहले दिन ही कोई बोले मैं बहुत सत्कर्मी हूं, मुझे छोड़ दो — तो थोड़े ही छोड़ेंगे; उसके कर्म को देखकर कुछ कम होगा। फाइनल खत्म तब होगा जब हर तरीके से सजा भोग लोगे, या कुछ छूट मिलेगी — और छूट सत्कर्म से मिलेगी। तो जितना ज्यादा हो सके सत्कर्म करो, उतनी छूट की संभावना है।
किसी ने बड़ा अभिशाप दिया होगा जो हमें पता नहीं — तो बस एक ही रास्ता है: छोटे-छोटे सत्कर्म बढ़ते-बढ़ते उस बड़े को भी काट देंगे, सबको काट देंगे। आप बस सत्कर्म में लग जाओ, भारी छूट है। भोग तो भोग ही रहे हो — जब से समझने लायक हुए, देखो तो भोग ही रहे थे; हर समय अपने आप को लोगों के लिए बनाने में ही लगे रहे, कितने परेशान रहे। सुख का एक भी दिन नहीं — मशीन की तरह, जैसे कोई भगा ही रहा है; रात को सो रहे हो तो भी लग रहा है भाग ही रहे हो। हमें बहुत समझकर जीना है।
और अगर हमने किसी को परेशान किया है तो कोई हमें परेशान करे, उसको हम झेल लें — वहां भी कट जाएगा, ऐसे भी हो सकता है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14