प्रश्नोत्तर P21-0134 · भाग 21
गुरु जी, (इनके) भाई-बहन काम के लिए मां को छोड़कर चले गए, बड़े भाई की शादी हुई पर उसका बोझ भी इन पर है; मां इन्हें नहीं छोड़ रही, इसलिए ये कहीं नहीं जा सकते — पर वहीं बैठकर साधना क्या है, आध्यात्म क्या है, यह समझना चाहते हैं और वह भी नहीं हो रहा। इससे कैसे बाहर आएं?
पहले मां से कहिए कि अगर वो बेटे आपको छोड़कर गए तो आपकी जिम्मेदारी मेरी — मैं आपकी सेवा करूंगा, लेकिन जितनी प्रॉपर्टी है सब मुझे चाहिए; उसमें मां का भी पता चलेगा। मां पूरी प्रॉपर्टी दे दे तो मां की सेवा करो, और प्रॉपर्टी बचे तो सत्कर्म में लगा देना — इसी से तेरा उद्धार हो जाएगा। और अगर मां कहे हम नहीं देंगे, तो बोल दो हम भी छोड़कर जा रहे हैं और तुम्हारी प्रॉपर्टी भी नहीं चाहिए — तब तुम्हें दोष भी नहीं लगेगा। ऐसे छोड़कर नहीं जा सकते, ऐसे जाओगे तो दोष लगेगा, क्योंकि अपने कल्याण के लिए निकल रहे हो, समाज कल्याण का भाव पैदा नहीं हुआ। अगर कुछ है ही नहीं, तो छोड़कर नहीं जा सकते — फिर उनकी सेवा करते हुए अपना कल्याण करो: अगर मां अपने हाथ से भोजन बना लेती हैं, तो 12 महीने में 11 महीने मां को दो और एक महीना किसी आश्रम में रहो जहां एकांत लगे और आत्मिक कल्याण का मार्ग बताया जाए। जैसे टावर के पास मोबाइल का नेटवर्क ज्यादा पकड़ता है, वैसे ही आश्रम, मंदिर, देवस्थान पर आत्मिक कल्याण के भाव से रहोगे — संचय, भोजन, व्यवस्था या आराम के भाव से नहीं — तो आपका नेटवर्क बड़ा तेज पकड़ेगा, साधना में सहायता मिलती है।
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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14