प्रश्नोत्तर P21-0133 · भाग 21
गुरु जी, अगला शरीर हमारे अभी के कर्मों पर निर्भर होता है, और कहते हैं हम पशु-पक्षी जैसी बहुत सी योनियों से होकर मानव शरीर तक आए — तो पशु से मानव शरीर तक आने के लिए क्या लगता है?
मानव शरीर हमें तब मिलता है जब हम भोग से योग की तरफ बढ़ते हैं। अगर हमारे जीवन में अभी भी योग है — इस शरीर में आत्मिक कल्याण के लिए साधना कर रहे हैं — तो अगला शरीर मानव का ही लूंगा। और अगर भोग ही कर रहा हूं, योग एकदम नहीं, आत्मिक कल्याण से कोई मतलब नहीं, संसार की वस्तुओं का ही महत्व है, तो अगला शरीर पशु का ही मिलेगा — फ्री में खाना, फ्री में रहना। पशु शरीर से मानव शरीर तो अपने आप आ रहा है, उसके लिए उसे कुछ नहीं करना, उसका दायरा फिक्स है। आपको मौका है — पशु शरीर धारण करोगे, अगला मानव शरीर, या शरीर ही धारण नहीं करोगे; देवता बनना है, राक्षस बनना है या महात्मा — पहले ये फैसला करना पड़ेगा कि मुझे चाहिए क्या और मैं बनूंगा क्या; तीनों का कर्म अलग-अलग है, मूल कर्म है।
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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14