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प्रश्नोत्तर P21-0120 · भाग 21

योगी जी, आप इच्छा छोड़ने की बात करते हैं — अगर सबने इच्छा छोड़ दी तो दुनिया में डेवलपमेंट कैसे होगा?

एक होता है जरूरत, एक होता है इच्छा। जरूरत मतलब जीवन जीने के लिए मुझे जितना चाहिए, अपनी योग्यता के अनुसार — वो जरूरत है। इच्छा क्या है? मेरी योग्यता नहीं है और मैं उसे पाना चाहता हूं — वो इच्छा है; और इच्छा-अपेक्षा ही दुख का कारण है। अपेक्षा क्या है? मैंने किसी के लिए किया, उससे बात नहीं की, पर इस भाव में किया कि समय आने पर ये मेरा करेगा — और जब वो नहीं करता तो बहुत दुख होता है। योग्यता से ज्यादा पाना चाहते हो तो बेईमानी करनी पड़ेगी — दिखावा, छल, कपट, चोरी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — उसमें आदमी गिर जाता है; कुछ चाहिए तो योग्यता बढ़ाओ। और अगर किसी के लिए कुछ करना पड़ रहा है तो उससे बात कर लो कि भाई मैं इसलिए कर रहा हूं कि समय आने पर तुम मेरा साथ दोगे या नहीं — दोगे तो करूं, नहीं तो ना करूं; बात खत्म। अपनी ऊर्जा सही जगह लगा दो — ईमानदारी और सत्कर्म में; पहले संकल्प ले लो कि अब मैं पूरी तरह ईमानदारी से जीवन जिऊंगा। सबसे ज्यादा बेईमानी बोलचाल में होती है, बिना मतलब के — कपड़ा 400 का लाते हैं, बताएंगे 1000 का; 4 ग्राम ज्यादा बताएंगे — इसे साधारण मत समझिए, इससे आप गिर रहे हो। आपका झूठ टिकेगा नहीं, कभी ना कभी उल्टी कर ही दोगे; और जिस दिन कोई ईमानदार आदमी मिल गया कि चलो वजन कराके दिखाओ, आप जिंदगी भर के लिए अपनी नजरों में गिर जाओगे। सच बोलने वाले को लोग ज्यादा पसंद नहीं करते — आप अपने आप को पसंद करते हो या नहीं, वो देखो। चोरी से धन संचय मत करो। एक जहाज में 99 छेद हैं, एक में सिर्फ एक — डूबेंगे दोनों, परिणाम एक ही आएगा। ये कर्म भूमि है, यहां फ्री में कुछ नहीं मिलता — फ्री का धनिया-मिर्च भी लिया तो उसकी भरपाई करनी पड़ेगी; लिया तो देना पड़ा, दिया तो मिलेगा — यही लेन-देन है, यही दुनिया। फ्री में पाने की इच्छा का त्याग करो और अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ जाओ।

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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14