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प्रश्नोत्तर P21-0011 · भाग 21

स्व के कर्ता को जाने बिना इच्छा-अपेक्षा का अंत नहीं आ सकता — जैसे गेहूं पर छिलका रहे तो वह उगता रहता है, छिलका हटा दो तो नहीं उगता; तो क्या स्व को जाने बिना इच्छा-अपेक्षा उगती नहीं रहेगी?

बिना इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हुए स्व में आ ही नहीं सकता, क्योंकि अब वह इच्छा-अपेक्षा में जा चुका है, जीवात्मा हो गया है — वह बदल गया है, और जब तक बदलाव खत्म नहीं होगा, स्व में नहीं आ पाएगा। बदलाव कब खत्म होगा? जब इच्छा-अपेक्षा छोड़ेगा। इच्छा-अपेक्षा का आवरण चढ़ा हुआ है, तभी वह जीवात्मा हो गया है; जब इसे छोड़ेगा तभी जीव का नाश होगा और तभी वह आत्म तत्व में स्थिर होगा, नहीं तो नहीं हो सकता। तो वह छिलका जिस तरीके से हमने बताया, उस तरीके से निकाल लेना।

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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07