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प्रश्नोत्तर P20-0197 · भाग 20

सुख और दुख कहां से आते हैं?

इच्छा और अपेक्षा ही सुख और दुख हैं — हमारे तरीके से हुआ तो सुख, नहीं हुआ तो दुख। न सुख है न दुख, न अच्छा न बुरा, न सच न झूठ — यह हमारी पैदावार है। हम इस जगत में नहीं फंसे; इस जगत में हमने अपना एक जगत बनाया है, उसमें फंसे हैं — सबका अपना-अपना जगत है, सब अपने-अपने जगत में रो रहे हैं, अशांत हैं। सामने से अर्थी निकल जाती है, आप कहते हो इसकी आत्मा को शांति मिले, कोई दुख नहीं होता; पर पता चले कि वह आपके परिवार का सदस्य है, तो दुख हो जाएगा। सुख-दुख "मेरा" में है, और मेरा का भाव वहीं है जहां पांच इंद्रियों — शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — में से कुछ मिलता है। किसी अनजान व्यक्ति से बिना परिचय के सुख-दुख पैदा ही नहीं कर पाओगे; परिचय हो, उसकी आवाज या रूप मेरे तरीके से है तो सुख, नहीं तो दुख — बस इतनी-सी बात है।

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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07