आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P2-0188 · भाग 2

गैर-जिम्मेदार व्यक्ति परिवार की जिम्मेदारी पर कहता है — मैं इतना ही कर पा रहा हूं, इस स्तर का काम मैं नहीं करूंगा, मेरी भी सेल्फ-रिस्पेक्ट है, मुझे टॉर्चर मत करो; यह मेरी आत्मरक्षा है। क्या यह आत्मरक्षा है?

वहां आत्मरक्षा की बात ही नहीं है। आत्मरक्षा तब है, जब आपको कोई सताता है और आप अपनी रक्षा करते हो। वहां परिवार की जिम्मेदारी की, कर्म की बात आ गई — कर्म सिद्धांत आ गया। कोई कहीं भी किसी शब्द का उपयोग कर देगा, हम उसे नहीं मान लेंगे। अब यह भी देखना है कि कहीं उसका परिवार सोसाइटी को देखकर ज्यादा मांग तो नहीं कर रहा; जिस स्तर पर, जैसी उसकी स्थिति है, वैसी मेहनत वह कर रहा है या नहीं। दोनों तरफ देखना पड़ेगा — मांगने वाले और देने वाले, दोनों की क्षमता क्या है; जो मांग रहा है, क्या वह उस लायक है, या इतना मांग लिया कि वह देने लायक है ही नहीं। यह निर्णय देश, काल, स्थिति, परिस्थिति देखकर लेना पड़ेगा।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: आखिर कब तक ये याद रहेगा ? #योगी · 2026-01-16